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गोरखपुर: सोहगीबरवा से रेस्क्यू कर चिड़ियाघर लाया गया तेंदुआ, इस वजह से हुआ था घायल

Sat, 04 Dec 2021 02:50 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

वन विभाग के सूत्रों ने बताया कि क्लच वायर का प्रयोग अक्सर वन्य जीव तस्कर वन्य जीवों के शिकार के लिए करते हैं। वे गाड़ी के क्लच वायर का एक फंदा बनाकर जंगल में लगा देते हैं।
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सोहगीबरवा से रेस्क्यू कर चिड़ियाघर लाया गया तेंदुआ। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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शिकारी के फंदे में फंसकर घायल हुए एक तेंदुए को सोहगीबरवा वन्य प्रभाग से शुक्रवार सुबह पांच बजे रेस्क्यू कर चिड़ियाघर लाया गया। उसका दायां पैर क्लच वायर के फंदे में फंसने से घायल है। यहां पशु अस्पताल में उसे इलाज के लिए रखा गया है। फिलहाल, अभी उसकी हालत स्थिर है। प्रबंधन ने बताया कि तेंदुए ने सुबह से कुछ भी नहीं खाया है।
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पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि सोहगीबरवा के उत्तरी वन चौक रेंज की कुसमहवां बीट में बृहस्पतिवार रात एक तेंदुए का पैर क्लच वायर के फंदे में फंस गया था। उन्होंने बताया कि रात 12 बजे टीम मौके पर पहुंची। वहीं उसको प्राथमिक उपचार दिया गया और पिंजड़े में रखकर सुबह पांच बजे चिड़ियाघर लाया गया। उपचार के बाद अब उसकी हालत स्थिर है। अगले एक से दो दिन में वह पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगा।

वन्य जीव तस्करों का अचूक हथियार है क्लच वायर फंदा

वन विभाग के सूत्रों ने बताया कि क्लच वायर का प्रयोग अक्सर वन्य जीव तस्कर वन्य जीवों के शिकार के लिए करते हैं। वे गाड़ी के क्लच वायर का एक फंदा बनाकर जंगल में लगा देते हैं। किसी वन्य जीव का पैर फंदे पर पड़ते ही वह खुद खिंच जाता है और जीव फंस जाता। इससे निकलने के लिए वन्य जीव जितना संघर्ष करता है, वह उतना ही घायल होता जाता है और आखिर में निढाल हो जाता है।
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