गोरखपुर चिड़ियाघर प्रबंधन ने एक तेंदुए का उपचार कर उसे वापस महराजगंज के सोहंगीबरवा जंगल में छोड़ा। ऐसा पहली बार हुआ है। पिछले तीन माह में तीन तेंदुओं को जंगल से रेस्क्यू (बचाव) करके चिड़ियाघर लाया गया था। प्रबंधन जल्द ही दो और तेंदुओं को जंगल में छोड़ेगा।
महराजगंज व बहराइच से तीन तेंदुए रेस्क्यू कर गोरखपुर चिड़ियाघर लाए गए थे। इनमें से एक तेंदुए का पैर काटने की नौबत आ गई थी, लेकिन उपचार के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। निदेशक चिड़ियाघर डॉ. एच राजा मोहन ने स्वस्थ हो चुके तेंदुओं को वापस जंगल में भेजने के लिए मुख्य वन संरक्षक गोंडा व दुधवा से अनुमति मांगी थी। अनुमति मिलने के बाद एक तेंदुए को जंगल में छोड़ दिया गया है।
बीते तीन दिसंबर को महाराजगंज के सोहगीबरवा से वन प्रभाग की टीम ने दस माह के मादा तेंदुए को रेस्क्यू किया था। टीम इसे चिड़ियाघर लेकर आई। तेंदुए का पैर गंभीर रूप से घायल था। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप व उनकी टीम ने उसका उपचार किया था।
पांच दिसंबर को भी लक्ष्मीपुर (महराजगंज) के जंगल से एक तेंदुआ चिड़ियाघर लाया गया था। उसने एक युवक पर हमला भी कर दिया था और खुद भी घायल हो गया था। 24 जनवरी को बहराइच से भी एक हिंसक तेंदुए को लाया गया था। उसने वहां चार बच्चों की जान ले ली थी।
उपचार के बाद वह भी पूरी तरह स्वस्थ हो गया है। चिड़ियाघर के पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि सभी तेंदुए पूरी तरह स्वस्थ हैं। तीन चिकित्सकों की टीम इनका स्वास्थ्य परीक्षण भी कर चुकी है।