गोरखपुर। यात्रा भत्ता, काम की अधिकता सहित विभिन्न मांगों को लेकर अतिरिक्त हल्के का बहिष्कार कर रहे लेखपालों का कहना है कि विभागीय स्तर पर पर्याप्त संसाधन नहीं होने के बावजूद उनसे ऑनलाइन काम लगातार कराया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार की ओर से वर्ष 2019 में दिए गए लैपटॉप और स्मार्ट मोबाइल फोन लंबे समय से खराब हैं। करीब पांच साल पहले ही लैपटॉप उपयोग के लायक नहीं रह गए, जबकि मोबाइल फोन भी काम करना बंद कर चुके हैं। ऐसे में कई लेखपाल अपने निजी कंप्यूटर और मोबाइल से विभागीय ऑनलाइन काम निपटाने को मजबूर हैं।
लेखपाल संघ के तहसील अध्यक्ष अनिल कुमार राय का दावा है कि वर्ष 2019 में उपलब्ध कराए गए मोबाइल फोन गुणवत्ता के लिहाज से ठीक नहीं थे और अधिकांश फोन काफी पहले खराब हो गए। विरोध के तौर पर कुछ लेखपालों ने अपने मोबाइल तहसील में जमा भी कराए थे। उनका कहना है कि संसाधनों के अभाव के बावजूद ऑनलाइन कार्यों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
इन प्रमुख ऑनलाइन कामों की जिम्मेदारी
1-प्रमाणपत्रों का सत्यापन : यूपी ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर नागरिकों की ओर से किए गए आवेदन की जमीनी जांच के बाद लेखपाल ऑनलाइन रिपोर्ट लगाते हैं। इसमें जाति, आय, निवास, ईडब्ल्यूएस और हैसियत प्रमाणपत्र प्रमुख हैं।
2-भूलेख से जुड़े काम : उत्तर प्रदेश भूलेख पोर्टल पर ऑनलाइन वरासत और उत्तराधिकार दर्ज करना, खतौनी में संशोधन व दुरुस्ती तथा भूखंड का विशिष्ट कोड तैयार करने से संबंधित जांच और रिपोर्ट का काम भी लेखपाल करते हैं।
3-डिजिटल फसल सर्वे व किसान रजिस्ट्री : खेतों में जाकर मोबाइल एप के माध्यम से किस गाटा संख्या में कौन सी फसल बोई गई है, इसकी ऑनलाइन जानकारी दर्ज करनी होती है। साथ ही किसानों की भूमि संबंधी जानकारी को फार्मर रजिस्ट्री में दर्ज करने की जिम्मेदारी भी रहती है।
4-पैमाइश और राजस्व न्यायालय की आख्या : आरसीसीएमएस के माध्यम से जमीन की पैमाइश और सीमांकन से जुड़े ऑनलाइन आवेदनों की जांच कर आख्या देनी होती है। राजस्व विवादों और मुकदमों से संबंधित रिपोर्ट भी ऑनलाइन भेजी जाती है।
5-आपदा में नुकसान का सर्वे : बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि और अग्निकांड जैसी घटनाओं में फसलों व संपत्ति के नुकसान का डिजिटल सर्वे कर राहत एवं मुआवजा संबंधी ऑनलाइन फीडिंग भी लेखपाल करते हैं।