इस प्रोजेक्ट के कोआर्डिनेटर प्रो. एसके सोनी हैं। उन्होंने बताया कि खेत से मिट्टी लेकर लैब में नमी, उर्वरक, बीज के बढ़ने की क्षमता आदि की जांच करेंगे। इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड सॉफ्टवेयर में उसे अपलोड किया जाएगा। सॉफ्टवेयर ऑनलाइन मौसम के डेटा और फसल के डेटा को रिसर्च कर बता देगा कि मिट्टी में किस महीने में कौन सी फसल की बुवाई करें तो सर्वाधिक उत्पादन होगा।
मिट्टी की जांच के लिए होगी लैब की सुविधा
एमएमएमयूटी मिट्टी की जांच के लिए लैब भी स्थापित करने जा रहा है। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विश्वविद्यालय अपने शोध में इस लैब का इस्तेमाल तो करेगा ही किसानों के खेत की मिट्टी की जांच भी निशुल्क करेगा। रोजाना 50 नमूने जांचें जाएंगे। जिन नमूनों की जांच होगी उनका ब्यौरा लैब में सुरक्षित रखा जाएगा और उसे सॉफ्टवेयर से लिंक कर देंगे।
कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने कहा कि इस वर्ष के अंत तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉडल पर काम शुरू हो जाएगा। किसानों के लिए यह बहुत ही कारगर साबित होगा। इससे खेत में ज्यादा सिंचाई और ज्यादा मात्रा में उर्वरक डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही अधिक उत्पादन वाली फसल की बुवाई करेंगे तो किसानों को मुनाफा भी ज्यादा होगा।