समूह की महिलाओं ने अगरबत्ती बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने समूह व अन्य समूह की महिलाओं के साथ अगरबत्ती बनाने का भी काम किया। ग्राम संगठन से आजीविका फंड का उपयोग कर अगरबत्ती बनाने की मशीन लगाई और कारोबार बढ़ाया। प्रगति प्रेरणा के नाम से अगरबत्ती की मार्केटिंग की।
इससे समूह की सदस्यों को महीने की सात से आठ हजार रुपये तक की आमदनी हुई। समूह की महिलाओं ने गोभी और मिर्च की भी खेती की। इससे अच्छा मुनाफा हुआ। अगरबत्ती और सब्जी उत्पादन के काम में 10 समूहों की करीब 120 महिलाओं की टीम बनाकर उन्हें भी रोजगार से जोड़ा गया। कुछ महिलाओं ने परचून की दुकान तो कुछ ने कपड़े व सब्जी की दुकान खोल ली है। सब आत्मनिर्भर बनी हैं।
फिर स्कूली ड्रेस सिल रहीं महिलाएं
संगठन की कोषाध्यक्ष मंजू देवी ने बताया कि वर्तमान में 23 विद्यालयों के बच्चों की ड्रेस सिलने का काम मिला है। एक ड्रेस सिलने के 110 रुपये मिल रहे हैं। आधा काम पूरा हो चुका है, समय से आपूर्ति हो जाएगी। दो दिनों से बारिश की वजह से काम बंद है। सदस्य सिलाई सेंटर तक नहीं आ पा रहीं हैं। सेंटर में भी पानी भर गया है। बृहस्पतिवार को भी समूह की सदस्य, सेंटर से पानी निकालती हुई नजर आईं।
पांच साल में पांच से 85 सदस्य हो गए
प्रगति प्रेरणा स्वयं सहायता समूह का पांच साल पहले जब गठन हुआ तो उसमें सिर्फ पांच सदस्य थे। वर्तमान में इस महिला समूह की संख्या 85 हो गई है जिनमें 35 महिलाएं सिलाई का काम कर रही हैं। सचिव मंजू का कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से ड्रेस की सिलाई का और भी काम मिलने की उम्मीद है।