सर्दियों में कम शारीरिक श्रम के चलते नसें भी शिथिल हो जाती हैं। ऐसे में अचानक सर्दी या गर्मी के चलते उनमें रक्त प्रवाह तेज होता है, जिस वजह से ब्लड प्रेशर, हर्ट अटैक के मामले बढ़ जाते हैं। इस समय धूल भी ज्यादा है। इस समय सबसे बेहतर है कि इस समय मार्निंग वॉक से बचें। सूर्योदय के बाद घर से बाहर निकलें। वातावरण सामान्य होने पर दिक्कत कम होती है।
-डॉ. राकेश पांडेय, हृदय रोग विशेषज्ञ।
नाक व मुंह को ढंककर घर से निकलें
निर्माण कार्यों के अलावा घरों की सफाई व रंगाई-पुताई के दौरान तमाम हानिकारक कण हवा में उड़ रहे हैं, जिससे अस्थमा के रोगियों को दिक्कत आती है। धूल के कण से किसी सामान्य इंसान को भी खांसी और एलर्जी हो सकती है। इसलिए, ऐसे मौसम में नाक व मुंह को ढककर घर से बाहर निकलना सबसे बेहतर विकल्प है। दमा, अस्थमा के मरीजों को धूल व धुंए से दूर रहने, स्वच्छता अपनाने तथा अपनी नियमित दवाएं और इनहेलर का प्रयोग जरूरी है। अगर नियमित टहलने के आदी हैं तो कोशिश करें कि जिधर धूल उड़ रही है, उधर न जाना पड़े।
-डॉ. नसीम अरशद, छाती रोग विशेषज्ञ।
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इस वक्त आंखों की सुरक्षा को लेकर विशेष एहतियात बरतने की जरूरत है। क्योंकि धूल के कण आंख में जाकर एलर्जी पैदा कर सकते हैं, जिससे कांजेक्टिवाइटिस का खतरा रहता है। बाइक चलाते समय चश्मा या हेलमेट का ग्लास गिराकर रखें। अगर पैदल भी जा रहे हैं तो धूल व धुएं से आंखों को जरूर बताएं। इस वक्त हवा में तमाम हानिकारक पार्टिकल उड़ते रहते हैं, इसलिए अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी।
-प्रो. रामकुमार जायसवाल, नेत्र रोग विशेषज्ञ बीआरडी मेडिकल कॉलेज।
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ये दिक्कतें हो सकती हैं
- आंखों में खुजली या आंखों का लाल होना
- बार-बार छींक आना
- नाक से पानी बहना
- खांसी की समस्या
- सांस लेते वक्त घरघराहट की आवाज आना
- स्किन पर खुजली महसूस होना
- सीने में जकड़न महसूस होना
- सांस लेने में दिक्कत होना
- गले में खराश
बचाव के तरीके
- काला चश्मा व मास्क लगाकर निकलें
- घर पहुंचकर ठंडे पानी से आंख धुलें
- मार्निंग वॉक पर सूर्योदय के बाद निकलें
- कपड़ें रोजाना जरूर धुलें