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गोरखपुर की हवा हुई प्रदूषित: वायुमंडल में जमी है धूल...मार्निंग वॉक की न करें भूल

Sat, 28 Oct 2023 12:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

गोरखपुर शहर में सिक्सलेन, फोरलेन, फ्लाईओवर सहित करीब आधा दर्जन निर्माण कार्य चल रहे हैं। इन जगहों पर मिट्टी पटाई, खोदाई सहित अन्य गतिविधियों की वजह से खूब धूल उड़ रही है। निर्माण स्थलों के साथ-साथ मोहल्लों में हवा की गुणवत्ता बिगड़ रही है।
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फलमंडी के सामने उड़ रही धूल। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर में ओस की बूंदों की चलते हवा में नमी बढ़ गई है। सड़क पर उड़ती धूल वायुमंडल में ऊपर तक नहीं जा पा रही है। इसके चलते करीब 300 मीटर की ऊंचाई पर धूल एक परत सी जमी है। देखने में तो यह धुंध और कोहरे जैसा है, लेकिन यह वास्तव में धूल के कण हैं। पर, यह सेहत के लिए बहुत ही खतरनाक हैं। इससे सांस, हृदव व त्वचा संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में बीमार व बुजुर्ग लोग मार्निंग वॉक में सतर्कता बरतनी चाहिए।
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शहर में सिक्सलेन, फोरलेन, फ्लाईओवर सहित करीब आधा दर्जन निर्माण कार्य चल रहे हैं। इन जगहों पर मिट्टी पटाई, खोदाई सहित अन्य गतिविधियों की वजह से खूब धूल उड़ रही है। निर्माण स्थलों के साथ-साथ मोहल्लों में हवा की गुणवत्ता बिगड़ रही है। शहर में पैडलेगंज से नौसड़ तक सिक्सलेन रोड और टीपी नगर से देवरिया बाईपास तक फ्लाईओवर का निर्माण कार्य चल रहा है। पानी का छिड़काव नहीं होने से धूल मिट्टी से राहगीर तो परेशान हैं ही ट्रैफिक पुलिस वालों को भी काफी असुविधा हो रही है।

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एक्सपर्ट की राय
सर्दी का मौसम आ रहा है। हवा में धूल के बारीक कणों की तादाद बढ़ती जा रही है। हवा में धीरे-धीरे धुंध और कोहरे का असर बढ़ेगा। इस मौसम में हवा में नमी बढ़ जाती है। धूल के बारीक कण आपस में चिपक जाते हैं। इससे उनका प्रसार नहीं हो पाता है। इस वजह से वायु प्रदूषण बढ़ जाता है। ऐसे में टहलने जाने वाले लोगों को भी सावधानी बरतनी होगी। -प्रो. गोविंद पांडेय, पर्यावरणविद्।

सांस व हृदय रोगी मार्निंग वॉक से बचें

सर्दियों में कम शारीरिक श्रम के चलते नसें भी शिथिल हो जाती हैं। ऐसे में अचानक सर्दी या गर्मी के चलते उनमें रक्त प्रवाह तेज होता है, जिस वजह से ब्लड प्रेशर, हर्ट अटैक के मामले बढ़ जाते हैं। इस समय धूल भी ज्यादा है। इस समय सबसे बेहतर है कि इस समय मार्निंग वॉक से बचें। सूर्योदय के बाद घर से बाहर निकलें। वातावरण सामान्य होने पर दिक्कत कम होती है।-डॉ. राकेश पांडेय, हृदय रोग विशेषज्ञ।

नाक व मुंह को ढंककर घर से निकलें
निर्माण कार्यों के अलावा घरों की सफाई व रंगाई-पुताई के दौरान तमाम हानिकारक कण हवा में उड़ रहे हैं, जिससे अस्थमा के रोगियों को दिक्कत आती है। धूल के कण से किसी सामान्य इंसान को भी खांसी और एलर्जी हो सकती है। इसलिए, ऐसे मौसम में नाक व मुंह को ढककर घर से बाहर निकलना सबसे बेहतर विकल्प है। दमा, अस्थमा के मरीजों को धूल व धुंए से दूर रहने, स्वच्छता अपनाने तथा अपनी नियमित दवाएं और इनहेलर का प्रयोग जरूरी है। अगर नियमित टहलने के आदी हैं तो कोशिश करें कि जिधर धूल उड़ रही है, उधर न जाना पड़े।-डॉ. नसीम अरशद, छाती रोग विशेषज्ञ।

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धूल के कणों से फैल सकती है कांजेक्टिवाइटिस

इस वक्त आंखों की सुरक्षा को लेकर विशेष एहतियात बरतने की जरूरत है। क्योंकि धूल के कण आंख में जाकर एलर्जी पैदा कर सकते हैं, जिससे कांजेक्टिवाइटिस का खतरा रहता है। बाइक चलाते समय चश्मा या हेलमेट का ग्लास गिराकर रखें। अगर पैदल भी जा रहे हैं तो धूल व धुएं से आंखों को जरूर बताएं। इस वक्त हवा में तमाम हानिकारक पार्टिकल उड़ते रहते हैं, इसलिए अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी।-प्रो. रामकुमार जायसवाल, नेत्र रोग विशेषज्ञ बीआरडी मेडिकल कॉलेज।

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ये दिक्कतें हो सकती हैं
  • आंखों में खुजली या आंखों का लाल होना
  • बार-बार छींक आना
  • नाक से पानी बहना
  • खांसी की समस्या
  • सांस लेते वक्त घरघराहट की आवाज आना
  • स्किन पर खुजली महसूस होना
  • सीने में जकड़न महसूस होना
  • सांस लेने में दिक्कत होना
  • गले में खराश
बचाव के तरीके
  • काला चश्मा व मास्क लगाकर निकलें
  • घर पहुंचकर ठंडे पानी से आंख धुलें
  • मार्निंग वॉक पर सूर्योदय के बाद निकलें
  • कपड़ें रोजाना जरूर धुलें
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