सरकारी दस्तावेजों में जिंदा होने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद नूर मोहम्मद अब अपनी पैतृक जमीन और आवास पाने की जद्दोजहद में जुट गए हैं। इस संबंध में उन्होंने सोमवार को चकबंदी अधिकारी गोपलापुर के यहां आवेदनपत्र दिया। सीओ गोपलापुर ने आवेदन स्वीकार कर विपक्षियों को नोटिस जारी किया है।
पिपरौली ब्लॉक के जैतपुर, गौसपुर गांव निवासी नूर मोहम्मद तीस वर्ष बाद दिल्ली से अपने गांव लौटे तो पता चला कि 2008 में हुई चकबंदी में सरकारी कागजात में उन्हें मृत दर्शा कर भू-माफिया ने उनके पैतृक आवास और जमीन पर कब्जा कर लिया है। इसके बाद उन्होंने सरकारी कागजात में खुद को जिंदा करने और जमीन-आवास पाने की जद्दोजहद शुरू की।
अमर उजाला में यह मामला प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद आला अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया और बीते शनिवार को चकबंदी अधिकारी रुस्तमपुर ने उन्हें जिंदा मान कर सीओ गोपलापुर को आगे की कार्रवाई का आदेश जारी किया था।
सोमवार को नूर मोहम्मद सीओ रुस्तमपुर के आदेश की प्रति लेकर सीओ गोपलापुर के कार्यालय पहुंचे और कार्रवाई का आवेदन किया। सीओ गोपलापुर ने बताया कि नूर मोहम्मद का आवेदन स्वीकार कर लिया गया है। विपक्षियों को 25 अक्तूबर को सारे दस्तावेज लेकर कार्यालय आने का नोटिस जारी किया गया है।
'नूर मोहम्मद, मैं अभी जिंदा हूं'
प्रशासनिक अधिकारियों तक मामला पहुंचने के बाद भी अब तक जमीन और आवास वापस न मिलने से नूर मोहम्मद काफी आहत हैं। विरोध का उन्होंने अनोखा तरीका अख्तियार किया है। उन्होंने अपनी टोपी पर 'नूर मोहम्मद, मैं अभी जिंदा हूं' लिखवा लिया है। विरोध के उनके इस तरीके की क्षेत्र में काफी चर्चा है।