खड्डा। पीआरडी जवान रमाकांत तिवारी की हत्या के बाद से ही परिजन एसओ हनुमानगंज की भूमिका को लेकर संदेह जता रहे हैं। रविवार को एएसपी के सामने भी परिजनों ने एसओ पर गंभीर आरोप लगाए थे। परिजनों ने बताया कि एक जमीन के पैमाइश को लेकर मृतक ने एसओ का विरोध किया था। इसके बाद से ही एसओ पीआरडी जवान से खफा चल रहे थे। परिजनों ने एसओ पर हत्या में शामिल होने तक गंभीर आरोप लगाते हुए प्रकरण की न्यायिक जांच कराने की मांग की है।
मृतक रमाकांत तिवारी के पुत्र मनोज तिवारी का कहना है कि उनकी मां की 20 वर्ष पहले ही मौत हो चुकी थी। एक पिता ही थे, जो परिवार का सहारा थे। उनका कहना है कि उनके पिता की हत्या कराने में एसओ की संलिप्तता है। एक जमीन की पैमाइश को लेकर एसओ व उनके पिता रमाकांत तिवारी में नोकझोंक भी हुई थी। हनुमानगंज थाने से उनके पिता ने तबादला किए जाने की मांग भी की थी, लेकिन एसओ ने उस वक्त यह कहा था कि रमाकांत तिवारी के बदले चार पीआरडी जवानों को भले ही भेज दूंगा, लेकिन उसे नहीं भेजूंगा। मृतक के पुत्र ने एसओ के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने की मांग की।
वहीं, घटना के वक्त मौजूद रहे साथी पीआरडी जवान व मृतक रमाकांत तिवारी के रिश्ते में भतीजा आनंद कुमार उर्फ नन्हे तिवारी ने बताया कि वह और रमाकांत तिवारी थाने के सिपाही सत्यवान यादव के साथ छितौनी पुलिस चौकी के पास ही ड्यूटी कर रहे थे। देर रात के वक्त सिपाही कहीं चला गया। दो लोग ही ड्यूटी पर थे। इसी दौरान आरोपी वहां पहुंचा और पुलिस को ही अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करने लगा। इसको लेकर उनके चाचा ने टोका तो आरोपी थोड़ी देर बाद वहां पहुंचा और हमला कर दिया। भतीजे ने बताया कि यह देख उन्होंने शोर भी मचाया। चौकी पर से पुलिसकर्मियों को बुलाने भी पहुंचा। मामले में कहीं न कहीं पुलिस से चूक जरुर हुई है। वरना, इतनी बड़ी घटना को आरोपी अंजाम नहीं दे सकता था।