बच्चों के शादी की उम्र होते ही माता-पिता बच्चों के लिए रिश्ते ढूढंने लगते हैं। ऐसे में उम्र होने के बावजूद जब रिश्ते नहीं मिलते हैं तो माता-पिता परेशान होते हैं। ज्योतिष में विवाह के रिश्ते नहीं मिलने को कुंडली दोष माना जाता है। कुंडली में कई ऐसे ग्रह होते हैं जो शादी-विवाह में रुकावट डालते हैं।
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, कुंडली में छठा तथा दसवां घर विवाह में रुकावटें उत्पन्न करता है। शनि सातवें घर में हो तब भी विवाह में विलंब होता है। वहीं, मंगल, राहू तथा केतु यदि सातवें घर में हो तो भी शादी में देर होती है। शनि, मंगल, शनि राहू, मंगल राहू, या शनि सूर्य या सूर्य मंगल, सूर्य राहू, एकसाथ सातवें घर या आठवें घर में हो तो भी विवाह में रुकावटें आती है। मांगलिक होना भी विवाह में देरी का कारण है।
बताया कि अगर विवाह योग्य लड़के-लड़कियों की शादी में बाधाएं आ रही हैं तो उन्हें गणेशजी की पूजा करनी चाहिए। इसके साथ ही शीघ्र विवाह के लिए भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की गुरुवार के दिन पूजा करनी चाहिए। शिवजी के साथ ही माता पार्वती की भी पूजा करें। मां पार्वती को सुहाग का सामान चढ़ाएं। इससे विवाह से जुड़ी बाधाएं दूर हो सकती हैं। विवाह में बाधाएं उत्पन्न करने वाले ग्रह बृहस्पति, शनि और मंगल के उपाय भी जरूर करें।