नक्षत्रों का जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव होता है। नक्षत्र जीवन की दिशा तय करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक कुल 27 नक्षत्रों को तीन भागों में बांटा गया है। शुभ नक्षत्र, मध्यम नक्षत्र और अशुभ नक्षत्र। ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, आइए जानते हैं कौन से नक्षत्र शुभ, मध्यम और अशुभ हैं और यह कार्यों पर किस तरह से प्रभाव डालते हैं।
शुभ नक्षत्र
शुभ नक्षत्र वो होते हैं जिनमें किए गए सभी काम सिद्ध और सफल होते हैं। इन नक्षत्रों में रोहिणी, अश्विन, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, चित्रा, रेवती, श्रवण, स्वाति, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा फाल्गुनी, घनिष्ठा, पुनर्वसु।
मध्यम नक्षत्र
मध्यम नक्षत्र वह होते हैं जिसमें कोई बड़ा काम करना नहीं करना चाहिए, लेकिन सामान्य कामकाज के लिहाज से कोई नुकसान नहीं होता। इनमें पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, पूर्वाभाद्रपद, विशाखा, ज्येष्ठा, आर्द्रा, मूला और शतभिषा।
अशुभ नक्षत्र
अशुभ नक्षत्र में तो कोई शुभ काम नहीं करना चाहिए। इससे नुकसान हो सकता है। अशुभ नक्षत्रों में भरणी, कृतिका, मघा और आश्लेषा।