इससे फसल बीमा भी मिलेगा
केसीसी खाते से बोई गई फसल के क्षेत्रफल के आधार पर ऋण मिलता है। मसलन, एक हेक्टेयर गेहूं बोने वाले किसान को आसानी से 50 से 65 हजार रुपये तक का ऋण मिल सकता है। छह माह के अंदर ऋण वापस करने पर किसान को केवल चार प्रतिशत ब्याज देना होगा। छह माह से एक साल के बीच सात प्रतिशत और इसके बाद बैंक की अन्य दरें लागू होती हैं। खाते से ऋण देने के साथ किसानों की सहमति पर संबंधित फसल का बीमा हो जाता है, जिसके प्रीमियम की राशि इस खाते से कटती है। अगर फसल खराब हुई तो इस खाते में फसल बीमा का लाभ किसान को मिलेगा। इसके विपरीत खाता नहीं होने पर फसल बीमा के लिए किसान को कई प्रक्रियाओं का पालन करना होता है। खेती के वक्त ऋण के लिए भी उसे साहूकार का चक्कर लगाना पड़ता है।
जिला कृषि अधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि केसीसी की जिम्मेदारी बैंकों की है। प्रधानमंत्री सम्मान निधि पाने वाले सभी किसानों का केसीसी खाता खुलना है। इससे किसानों को आसानी से खेती के लिए ऋण मिल सकता है। साथ ही फसलों का बीमा कराने के लिए भी परेशान नहीं होना पड़ेगा। दिसंबर में बैंक अफसरों के साथ बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी।
जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक रामसमुझ ने बताया कि खाता खोलने की जिम्मेदारी बैंकों की है, लेकिन किसानों का विवरण कृषि विभाग को उपलब्ध कराना है। कृषि विभाग की तरफ से 749 किसानों की एक सूची दी गई थी, जिसमें से 83 किसानों का विवरण तक ठीक नहीं है। किसान सीधे भी बैंक आकर अपना खाता खुलवा सकते हैं। जिनका खाता नहीं खुला है, उनमें तमाम ऐसे किसान हैं, जिनके पास अत्यंत कम जोत है।