इसका दुष्प्रभाव ऐसा हुआ कि दिमाग में पानी जमा होने लगा। इस पर डॉ. सुमित की टीम ने ऑपरेशन का फैसला लिया। जब जांच शुरू की गई तो पता चला कि महिला को सवाईनल स्पाइन टीबी भी है। इसके अलावा हेपेटाइटिस-सी की भी पुष्टि हुई। डॉ. सुमित ने बताया कि निमिता के दिमाग की नसों में टीबी की वजह से ज्यादा गांठ बन गई हैं, जिसके कारण सांस की नसें भी प्रभावित होने लगी है और दिमाग में पानी जमा होने लगा है।
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इस पानी को निकालने के लिए पेट में एक ड्रेन लगाया गया हैं। लेकिन, मरीज का ऑपरेशन ज्यादा जरूरी है। इसके लिए हायर सेंटर रेफर किया गया था। लेकिन, परिजन फिर से मरीज को बीआरडी ले आए हैं, जिसका इलाज किया जा रहा है। परिजनों ने बताया कि हायर सेंटर पर हेपेटाइटिस की वजह से ऑपरेशन करने से मना कर दिया गया है। ऐसी स्थिति में बीआरडी में इलाज कराया जा रहा है।
डॉ. सुमित ने बताया कि इस तरह के मामले एक लाख में एक आते हैं, जिसके दिमाग और स्पाइन दोनों में टीबी मिली है। दिमाग की टीबी ज्यादा खतरनाक है। क्योंकि, इसमें गांठें बननी शुरू हो जाती है, जो जल्दी टूटती नहीं है। कई बार मरीजों का ऑपरेशन करना पड़ता है। 95 फीसदी मरीजों मामलों में मरीज की मौत हो जाती है।