गोरखपुर महोत्सव के तहत आयोजित शिल्प मेला का आखिरी दिन कवि सम्मेलन के नाम रहा। जिसमें पूर्वांचल के सुप्रसिद्ध कवियों एवं शायरों ने अपनी कविता शायरी और गजलों से सबको मुग्ध कर दिया।
युवा शायर मिन्नत गोरखपुरी ने ‘मेरी आरजू है और तमन्ना तो बस यही, यूं मरूं की तिरंगा नसीब हो मुझको’ सुनाकर पूरे माहौल को देशभक्ति के रंग में रंगा। वहीं अध्यक्षता करते हुए डॉ. कलीम कैसर ने ‘युगों युगों गूंजे ये नारा, केवल इक दो सदी नहीं भारत जैसा देश नहीं’ सुनाकर वाहवाही लूटी।
डॉ. चारूशिला सिंह ने ‘प्रेम ही ताकत है पहचान है इसीलिए तो सदा हार जाती हूं मैं’ सुनाकर युवाओं का ध्यान आकर्षित किया। इसी क्रम में नुसरत अतीक ने ‘अपनी बदसूरती करो महसूस, हम तुम्हें आईना नहीं देंगे, सैयद आसिफ राऊफ ने ‘हिंदू मुस्लिम झगड़े में जब सारा लहू बहा दोगे, सरहद पर जब भारत माता खूं मांगेगी क्या दोगे’ नज्म सुनाकर कवि सम्मेलन को ऊंचाई प्रदान की। राजेश राज ने ‘जो बेटा किसी किसान का है, ये बच्चा हिंदुस्तान का है’। भीमसेन सिंह ने ‘एक निर्भया सिहर रही, अभिव्यक्तियां ठहर रही’।
भावना द्विवेदी ने ‘तुम्हारे प्यार में पड़कर जहर मैं खा नहीं सकती, लुटा कर घर की इज्जत को मोहब्बत पा नहीं सकती’ से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ लोकगीत गायक राकेश श्रीवास्तव ने दीप प्रज्वलित करके किया। इस अवसर पर पूर्व मेयर डॉ. सत्या पांडेय, मुमताज खान, आशीष रुंगटा, सुधा मोदी, शमशाद आलम एडवोकेट, प्रवीण श्रीवास्तव, अरशद अहमद, अनीता पाल सिंह, सुनीशा श्रीवास्तव, राज शेख, मोहम्मद अरशद, मोहम्मद सेराज सानू, सरदार जसपाल सिंह आदि मौजूद रहे।