कामदा एकादशी का व्रत श्रद्धालु शुक्रवार को लोगों ने रखा है। ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहते हैं। मान्यतानुसार इस एकादशी व्रत को जो भी श्रद्धालु करते हैं उस पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा होती है।
इस व्रत को करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही समस्त पापों का नाश भी हो जाता है। विष्णु पुराण में बताया गया है कि इस व्रत को करने से हजारों वर्ष की तपस्या के बराबर फल प्राप्त होता है।
ऐसे करें व्रत व पूजन
पंडित अवधेश मिश्रा के अनुसार सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। सर्वप्रथम सूर्य को अर्घ्य दें। उसके बाद पूजास्थल को गंगाजल से पवित्र करें। लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति को स्थापित करें और हाथ में जल लेकर व्रत करने का संकल्प लें। उसके बाद प्रणाम करके भगवान को हल्दी, अक्षत, चंदन, फल और फूल चढ़ाएं और रोली से टीका करके पंचामृत अर्पित करें। इसके बाद एकादशी की कथा पढ़कर आरती करें और प्रभु को भोग अर्पित करें। शाम में पूजा के बाद तुलसी के पौधे के नीचे घी का दीपक जरूर जलाएं।
एकादशी के दिन यह न करें
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन चावल खाने से व्यक्ति को अगले जन्म में रेंगने वाले जीव के रूप में जन्म मिलता है। इस दिन खाने में प्याज और लहसुन का प्रयोग न करें और पूरे दिन सात्विक आहार लें। इस दिन किसी से भी ऊंची आवाज में न बोलें और न ही किसी को अपशब्द कहें।