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जलपुरुष ने ‘साइंस’ को ‘सेंस’ से जोड़ने की दी सलाह, बोले- आध्यात्म को विज्ञान से जोड़ने पर ही स्थायी समाधान संभव

Tue, 09 Feb 2021 07:05 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में मुख्य अतिथि राजेंद्र सिंह, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, राज्य मंत्री संदीप कुमार सिंह, कुलपति प्रो जेपी पांडेय। - फोटो : अमर उजाला।
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पर्यावरणविद एवं जलपुरुष के नाम से मशहूर मैग्सेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह ने कहा कि तकनीक व इंजीनियरिंग समस्याओं के समाधान के अस्थायी रास्ते बताते हैं। यदि स्थायी समाधान चाहिए तो अध्यात्म को विज्ञान से जोड़ना होगा। विद्यार्थी तकनीक का इस्तेमाल पर्यावरण संरक्षण में करें। हमें साइंस (विज्ञान) और सेंस (चेतना) को जोड़कर देखना होगा। इससे ही भारत के सनातन धर्म की रक्षा और विकास दोनों संभव है।

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जलपुरुष राजेंद्र सिंह मंगलवार को एमएमएमयूटी के दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कुलाधिपति से अनुरोध किया कि पर्यावरण की रक्षा के लिए विश्वविद्यालयों में विशेष पाठ्यक्रम चलाने का निर्देश दें। ऐसा हुआ तो पंडित मदन मोहन मालवीय की आत्मा आनंदित हो उठेगी।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1916 में जब अंग्रेजों ने गंगा को कैनाल सिस्टम किया तब पं. मदन मोहन मालवीय ही ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने विरोध करते हुए कहा था कि मां गंगा हमारी आध्यात्मिक प्रवाह की धारा है। आप इसको अपनी इच्छा से बांध नहीं सकते।
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उन्होंने कहा कि जब तक पर्यावरण रक्षा के लिए अपनी आस्था से व्यवहार एवं जीवन के संस्कार को जोड़कर हमने कार्य किया तब तक भारत दुनिया को सिखाने के लायक बना रहा। जब हमारा विज्ञान अध्यात्म से जुड़ता है तब प्रकृति का रक्षण, संरक्षण, पोषण हमारे व्यवहार व संस्कार का हिस्सा बन जाता है।

आयुर्वेद का विद्यार्थी था, किसान से सीखा पानी का काम
राजेंद्र सिंह ने कहा कि मैं आयुर्वेद का विद्यार्थी था। मुझे प्रौद्योगिकी नहीं आती थी। मैंने किसान महंगू पटेल से सीखकर पानी का काम किया। पिछले 38 वर्षों से मैंने मानवीय चिकित्सा को छोड़कर धरती की चिकित्सा का कार्य शुरू किया तो 12 सूखी व मरी नदियों को 21वीं शताब्दी में पुनर्जीवित कर सका। मेरे पास जो कुछ भी है उसका कैसे अधिक इस्तेमाल कर सकते हैं, उसकी तकनीक को हम अपने पाठ्यक्रम में पढ़ाते हैं। लेकिन जलसंरक्षण की तकनीक पर काम नहीं होता। इसी का परिणाम है कि आज हमने तकनीक से पानी का डिस्चार्ज करना तो सीख लिया, लेकिन रिचार्ज करना भूल गए।
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