इसमें एक और भी सेंसर है जो वस्तु की गति को डिटेक्ट करते ही कैंप को सिग्नल भेजता है कि हमारे कैंप के रेड जोन क्षेत्र में कोई आया है। इस सेंसर को भी कैंप के 200 मीटर के एरिया में लगाया जा सकता है। कैंप में इलेक्ट्रिक सोलर गन भी लगाया गया है, जिसके माध्यम से कैंप के अंदर से दुश्मन को टार्गेट किया जा सकेगा। कैंप में लगे गन से हमारे जवान चारों तरफ रिमोट की सहायता से गोलियों की बौछार कर सकते हैं।
बताया कि कैंप का प्रोटोटाइप बनाने में 15 दिन का समय लगा है और इसे बनाने में, मेटल गन, हाफ इंच बैरल पाईप, 12 वोल्ट गियर मोटर, वायरलेस फ़ायरिंग, मैन्युअल फ़ायरिंग ट्रिगर, रेडियो सेंसर्स, सोलर 12 वोल्ट, बैटरी 9 वोल्ट, मॉनिटर डिस्प्ले आदि उपकरणों का प्रयोग किया गया हैं।
संस्थान के निदेशक डॉ एनके सिंह ने बताया कि छात्रों के द्वारा लाए गए इनोवेशन आईडिया अगर अच्छे हैं तो संस्थान उक्त छात्रों के आइडिया को नवाचार में बदलने के लिए हर संभव मदद प्रदान करता हैं। सेना के जवानों की सुरक्षा के लिए बनाया गया स्मार्ट कैंप जो देश के काम आ सकता है, इसके लिए हम कॉलेज प्रशासन की तरफ से देश के गृह मंत्री और रक्षा मंत्री को पत्र लिख रहे है। छात्रों के इस मॉडल को देखकर संस्थान के अध्यक्ष नीरज मातनहेलिया, सचिव श्याम बिहारी अग्रवाल, कोषाध्यक्ष निकुंज मातनहेलिया, संयुक्त सचिव अनुज अग्रवाल ने बधाई देते हुए प्रसन्नता व्यक्त की।