पैडलेगंज से ट्रांसपोर्टनगर के बीच सिक्सलेन की सड़क बन रही है। सड़क के दोनों तरफ नाले का भी निर्माण हो रहा है। फोरलेन बनने के बाद ट्रांसपोर्टनगर के अगल-बगल के इलाकों में जलभराव की स्थिति भयानक हो जाती थी। अब सिक्सेलन बनने से स्थिति और भी खराब हो जाएगी। क्योंकि, सिक्सलेन के दोनों तरफ नाला भी ऊंचा हो जाएगा। ऐसे में ट्रांसपोर्ट नगर के आसपास के मोहल्ले के पानी उस नाले में नहीं गिरेंगे। इसकी वजह से इन इलाकों के लोगों की मुसीबतें और भी बढ़ने वाली है।
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15 साल पहले बनी थी सड़क और नाली
ट्रांसपोर्ट नगर से सटे कान्हा उपवन नगर में करीब सात से आठ हजार की आबादी रहती है। यह इलाका राप्ती नदी से सटा हुआ है। इस इलाके में सबसे खराब स्थिति शीतला माता मंदिर से मंडी जाने वाली सड़क और नाली की है। यहां सीसी सड़क और नाली 15 साल पहले बनी थी। नालियां पूरी तरह से टूट चुकी हैं और बारिश के मौसम में इन नालियों का गंदा पानी लोगों के घरों में चला जाता है।
जिनके पास पैसा हैं, उन्होंने मकान करा लिया ऊंचा
कान्हा उपवन से लेकर ट्रांसपोर्ट नगर, महेवा मंडी, मिर्जापुर, चकरा अव्वल जैसे इलाकों में हर साल बरसात से लोग परेशान रहते हैं। इसी परेशानी को देखते हुए इन इलाकों के कुछ लोगों ने अपने-अपने आगे के मकान ऊंचे करा लिए हैं। जबकि, पीछे मकान का हिस्सा उसी तरह से है। लेकिन, जिनके पास पैसा नहीं हैं, वह हर साल इसे झेल रहे हैं।
अब तो मन करता है कि घर बेचकर कहीं और चली जाऊं। 20 साल पहले शादी हुई तो उसी दौरान यह सड़क और नाली बनी थी। तभी से यहां पानी लगता आ रहा है। कई बार इसकी शिकायत की गई, लेकिन आज तक समस्या का हल नहीं हो सका। मुश्किल है यह कि घर खरीदने वाला कोई भी नहीं मिल रहा है।
-लकी, कान्हा उपवन नगर।
बंद कर देता हूं गैराज, छतों पर रहते हैं लोग
बरसात का मौसम आते ही चिंता शुरू हो जाती है कि अब व्यापार बंद करना पड़ेगा। पूरा गैराज बंद करना पड़ता है। ऐसे पिछले 15 सालों से करना पड़ रहा है। गैराज के सामने नाव चलानी पड़ती है। हम लोगों का तो कुछ हद तक ठीक है। लेकिन, मोहल्ले के अंदर रहने वाले लोग छतों पर रहने को मजबूर रहते हैं।
-अजफल, गैराज मालिक, चकरा अव्वल।
घर में घुस जाता है पानी
मोहल्ले में बरसात के समय 10 से 15 दिनों तक पानी जमा रहता है। घर में पानी घुस जाता है। मजबूरी में छत या फिर ज्यादा दिक्कत होने पर रिश्तेदार के यहां जाना मजबूरी हो जाती है। पता नहीं कब तक यह सांसत झेलनी पड़ेगी।
-सोनी, ट्रांसपोर्ट नगर।
500 से ज्यादा लोगों के काम धंधे हो जाते हैं बंद
नगर निगम अगर चाहती तो इस समस्या का हल हो जाता, लेकिन निगम के अधिकारी रूचि ही नहीं दिखाते हैं। हर बरसात में हमें अपना ठिकाना बदलना पड़ता है। 500 से अधिक लोगों का काम धंधा चौपट हो जाता है। लेकिन, इस पर ध्यान देने वाला कोई नहीं है।
-रामेश्वर सहनी, कान्हा उपवन नगर।