संतोष शुक्ला ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की थी। इसके अलावा जन सुनवाई पोर्टल पर भी अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले में जवाब तलब किया तो जांच शुरू हो गई है। एम्स प्रशासन अपने रिकार्ड खंगाल रहा है।
भर्ती मरीज का क्यों ऑपरेशन नहीं हुआ और क्यों रेफर किया गया, इससे संबंधित जानकारी हड्डी रोग विभाग से ली गई है। इसके अलावा दलालों पर सख्ती के लिए पुलिस की भी मदद ली जाएगी। आगे ऐसी घटनाएं न हों, इस पर रोक लगाने के लिए पुलिस कर्मियों की सक्रियता बढ़ाई जाएगी। हालांकि, एम्स के जिम्मेदार इस पर सीधे कुछ कहने से परहेज कर रहे हैं।
एम्स गेट के इर्द-गिर्द अपना जाल फैला रखे दलालों को सीएम कार्यालय से जांच की भनक लग गई है। उन्हें अब ऐसे मामलों में कार्रवाई का डर सता रहा है। कुछ दिन पहले ही मेडिकल कॉलेज के पास से अपना नेटवर्क चलाने वालों पर भी पुलिस ने शिकंजा कसा था। एसएसपी के निर्देश पर पुलिस लगातार वहां से मरीज एंबुलेंस माफिया और खून माफिया के नेटवर्क को तोड़ने के लिए काम कर रही है।
कई एंबुलेंस को सीज किया गया। केस दर्ज कर कई लोगों को जेल भी भेजा गया है। जिला अस्पताल प्रशासन ने भी सख्ती शुरू कर दी है। वहां अंदर व बाहर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। अब एम्स के पास अड्डा जमाए दलालों पर सीएम की तिरछी नजर पड़ी है।
परिसर में खुलेगी एक और जन औषधि की दुकान
एम्स में हर दिन करीब ढाई हजार मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। इन सबको सस्ती दवा उपलब्ध कराने के लिए परिसर में केवल एक ही जन औषधि की दुकान है। एम्स के मीडिया प्रभारी पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि परिसर में जन औषधि की दो दुकानें खोलनी है। अभी एक ही दुकान संचालित हो रही है, जिससे सभी मरीजों को दवा व अन्य उपकरण मिलने में असुविधा होती है। जल्दी ही दूसरी दुकान भी खोल दी जाएगी।