- मानसी अस्पताल के डॉक्टर से कथित रूप से रंगदारी मांगे जाने का मामला
- पूर्व में जेल भेजे गए एजेंट और एंबुलेंस चालकों की कॉल डिटेल खंगाल रही पुलिस
- बिहार से लेकर कुशीनगर और सरकारी अस्पतालों के आसपास सक्रिय रहते हैं मरीज माफिया
गोरखपुर। मानसी अस्पताल के डॉक्टर पंकज दीक्षित से कथित रूप से रंगदारी मांगे जाने के मामले में नया मोड़ आने के बाद मरीज माफिया और डॉक्टर की सांठगांठ की जांच तेज हो गई है। उधर, पुलिस को बयान देने के लिए बृहस्पतिवार को भी डॉक्टर नहीं पहुंचे।
पिछले साल मरीज माफिया पर ताबड़तोड़ कार्रवाई हुई थी, जिससे कुछ हद तक शांति रही लेकिन मिलीभगत और नेटवर्क के कारण ये गतिविधियां फिर से बढ़ने लगी हैं। पुलिस अब पूर्व में जेल भेजे गए मरीज माफिया और एंबुलेंस चालकों की कॉल डिटेल खंगाल रही है, ताकि पता लगाया जा सके कि मानसी अस्पताल के डॉक्टर इस नेटवर्क के साथ किस हद तक जुड़े हैं।
शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित मानसी अस्पताल के संचालक डॉ. पंकज कुमार दीक्षित को दी गई धमकी और रंगदारी के मामले की जांच के दौरान ही मरीज माफिया का नेटवर्क सामने आया। प्रारंभ में मामला सिर्फ आपराधिक रंगदारी का प्रतीत हो रहा था लेकिन पुलिस की छानबीन में यह व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा और मरीजों की सप्लाई को लेकर चल रहे विवाद का मामला निकला।
जांच में पता चला कि डॉक्टर पहले अपने अस्पताल में बिहार से मरीज लाने के लिए बिट्टू खान की एंबुलेंस सेवा का उपयोग करते थे। हाल के दिनों में बिट्टू ने मरीजों को मानसी अस्पताल भेजने के बजाय सान्वी अस्पताल को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया। यही विवाद रंगदारी की शिकायत में तब्दील हो गया। इसके बाद कैंट पुलिस मरीज माफिया के एंगल पर जांच शुरू कर दी है। इधर लगातार संपर्क करने के बाद भी डॉक्टर बयान दर्ज कराने नहीं पहुंच रहे हैं। इसके बाद अब उन्हें नोटिस भेजने की तैयारी है।
सूत्रों ने बताया कि मरीजों और उनके परिजनों को मानसिक दबाव में रखा जाता है। उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता है कि बेहतर इलाज और बेड तभी मिलेगा, यदि वे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हों। एजेंट और एंबुलेंस चालकों को अस्पताल के बिल का 30 प्रतिशत हिस्सा कटता है। कई बार नॉन-क्वालिफाइड डॉक्टर भी खुलेआम इलाज करते हैं, जबकि रजिस्टर्ड डॉक्टर भी इस व्यवस्था में शामिल होते हैं। जिन डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन होते हैं, उन्हें इस नेटवर्क में शामिल होने के बदले लाखों रुपये मिलते हैं। अक्सर एजेंट और एंबुलेंस चालक आपस में मारपीट करते हैं और कई बार पुलिस भी इसी नेटवर्क के साथ मिलीभगत करती नजर आती है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मरीज माफिया बड़े पैमाने पर काम करते हैं और बिहार, कुशीनगर, एम्स, मेडिकल काॅलेज और जिला अस्पताल जैसी जगहें इनकी हॉट स्पॉट मानी जाती हैं।
मरीज माफिया पर पहले भी कई बार कार्रवाई हुई है। अब मानसी अस्पताल मामले में यदि किसी तरह के संबंध और मिलीभगत का सबूत मिलता है, तो त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
- अभिनव त्यागी, एसपी सिटी