मो. अजहर शम्सी
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किसी अच्छे काम को करने में उम्र मायने नहीं रखती। यह साबित किया है गोरखपुर शहर के तुर्कमानपुर के रहने वाले 24 साल के मुफ्ती मो. अजहर शम्सी ने। शहर के नायब काजी पद पर रहते हुए मुफ्ती मो. अजहर ने शहर के स्कूलों में पढ़ने वाले मुस्लिम बच्चों की दीनी तालीम के लिए ‘मकतब इस्लामियात’ की सात शाखाएं स्थापित कीं, जहां करीब 500 बच्चे दीनी तालीम हासिल करते हैं वह भी बिना किसी शुल्क के।
मुफ्ती अजहर ने करीब एक दर्जन मजहबी किताबें लिखी हैं। वर्ष 2014 में अवाम व उलेमा के लिए शम्सी लाइब्रेरी कायम की। अवाम के मजहबी मसले मसायल के हल के लिए शम्सी दारुल इफ्ता साल 2016 में स्थापित किया। साल 2017 में तंजीम उलेमा-ए-अहले सुन्नत के सैकड़ों आलिमों ने मुफ्ती मो. अजहर को शहर का नायब काजी नियुक्त किया। वह सबसे कम उम्र के नायब काजी हैं।
मजहबी व समाजी खिदमत की वजह से मुफ्ती मो. अजहर को साल 2018 के एक सेमिनार में ऑल इंडिया उलेमा व मसायख बोर्ड के संस्थापक सैयद मो. अशरफ मियां के हाथों कामली अवार्ड से नवाजे जा चुके हैं। जामिया शमसुल उलूम घोसी (मऊ) से मुफ्ती (पीएचडी के समकक्ष) डिग्री के साथ उप्र मदरसा शिक्षा परिषद से फाजिल की डिग्री भी हासिल कर चुके हैं।
इस वक्त जामिया रजविया मेराजुल उलूम चिलमापुर में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा शहर व देश में होने वाले जलसों व सेमिनारों में विभिन्न विषयों पर संबोधित करते हैं। नात व मनकबत भी लिखने का शौक है। कोरोना काल में नेशनल व इंटरनेशनल कांफ्रेंस में शामिल हो रहे हैं।