रिश्ते दरकने से बच्चों पर पड़ता है असर
कई ऐसे पीड़ित आ रहे हैं जिनके बच्चे छोटे हैं। अलग होने पर पति-पत्नी तो अपनी नई जिंदगी शुरू कर सकते हैं, लेकिन बच्चे माता-पिता के प्यार से वंचित हो जाते हैं। पिछले सप्ताह थाना परिसर में एक महिला छह साल के बच्चे को लेकर पहुंची थी। वह एक ऐसी बेटी की मां थी, जिसका पति से अलगाव हो गया था। अब वह बच्ची नानी के साथ थी, जिसके भरण-पोषण को लेकर महिला चिंतित थी।
केस-1
डोमिनगढ़ इलाके की एक महिला की शादी मई-2020 में हुई। इनकी छह माह की बेटी है। पति बेटी पैदा होने से नाराज रहता है। बच्ची और पत्नी का भरण पोषण नहीं करता। ससुराल वाले एक लाख रुपये दहेज लाने का दबाव डाल रहे हैं। महिला कई दिनों से थाने का चक्कर काट रही है। परिवार परामर्श केंद्र दंपती को साथ रखने की कोशिश के बजाय कोर्ट जाने की सलाह दे रहा है।
केस-2
गोरखनाथ क्षेत्र की महिला को पति मोबाइल फोन से मायके के सदस्यों से बात करने से मना करता है। उसे पत्नी का फेसबुक और व्हाट्सएप पर मैसेज करना पसंद नहीं है। पत्नी ने विरोध किया तो पति रिश्ता खत्म करने के लिए कह रहा है। मामला परिवार परामर्श केंद्र पहुंचा, लेकिन कोई निस्तारण नहीं हो सका। अलबत्ता दोनों पक्षों को रिश्ता खत्म करने की सलाह जरूर मिल गई।
केस -3
राप्तीनगर की रहने वाली महिला का पति से विवाद है। इनके रिश्तों में किसी तीसरे ने जहर घोल दिया है। मामला परिवार परामर्श केंद्र पहुंचा, तो विवाद की जड़ तलाशने के बजाय पत्नी को महिलाओं के गुण की नसीहत देकर घर भेज दिया गया। उधर, पति पत्नी को झगड़ालू बताते हुए साथ रखने के लिए तैयार नहीं है।
परिवार परामर्श केंद्र काउंसलर शिखा साहनी ने कहा कि परिवार परामर्श केंद्र में आए मामलों की काउंसिलिंग की जाती है। इस दौरान दंपती को हर तरह से समझाने की कोशिश की जाती है। कई बार बात बन जाती है, लेकिन कई मामलों में दंपती कुछ नहीं सुनते। ऐसे में दोनों को अलग-अलग रहने की सलाह दी जाती है।