फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Exclusive: पति-पत्नी के बीच सुलह कराने के बजाय अलग होने की दे रहे सलाह, परामर्श केंद्र उलझा रहा मामला

Tue, 15 Mar 2022 11:40 AM IST
vivek shukla मान्यता कुशवाहा, गोरखपुर।

सार

महिला थाने के परिवार परामर्श केंद्र का हाल, दंपती के आपसी विवादों को सुलझाने के लिए केंद्र खोला गया है।
विज्ञापन
सांकेतिक फोटो। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

महिला थाने का परिवार परामर्श केंद्र पति-पत्नी के रिश्ते को जोड़ने की जगह, अलग होने या कानूनी लड़ाई की सलाह दे रहा है। मामूली बात पर लड़ रहे दंपती यहां आते तो हैं राहत की उम्मीद में, लेकिन केंद्र की सलाह के बाद आगे की जिंदगी और कष्टमय हो जाती है।

विज्ञापन


तेजी से बदल रही सामाजिक व्यवस्था और एकल परिवारों के चलन ने पति-पत्नी के रिश्तों में भी विवाद बढ़ा दिया है। मामूली विवाद पर लोग पुलिस और कचहरी जाने लगे हैं। कानूनी लड़ाई के चलते पति-पत्नी के अलग होने का दंश बच्चों को भुगतना पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए महिला थाने में परिवार परामर्श केंद्र खोला गया है।

केंद्र में महिला पुलिस कर्मियों के अलावा दो काउंसलर भी रहती हैं। इनका मूल कार्य दंपती के विवादों को सुनकर समाधान कराना है। लेकिन, परामर्श केंद्र में सुलह के बजाय कानूनी लड़ाई की सलाह दी जा रही है। शिकायती पत्र मिलते ही दूसरे पक्ष को फोन करके बुलाया जाता है। एकाध बार सुनवाई के बाद दोनों पक्ष को अलग रहने अथवा कोर्ट में जाकर फैसला करा लेने को कह दिया जाता है।
विज्ञापन


 

विज्ञापन

रिश्ते दरकने से बच्चों पर पड़ता है असर

कई ऐसे पीड़ित आ रहे हैं जिनके बच्चे छोटे हैं। अलग होने पर पति-पत्नी तो अपनी नई जिंदगी शुरू कर सकते हैं, लेकिन बच्चे माता-पिता के प्यार से वंचित हो जाते हैं। पिछले सप्ताह थाना परिसर में एक महिला छह साल के बच्चे को लेकर पहुंची थी। वह एक ऐसी बेटी की मां थी, जिसका पति से अलगाव हो गया था। अब वह बच्ची नानी के साथ थी, जिसके भरण-पोषण को लेकर महिला चिंतित थी।

केस-1

डोमिनगढ़ इलाके की एक महिला की शादी मई-2020 में हुई। इनकी छह माह की बेटी है। पति बेटी पैदा होने से नाराज रहता है। बच्ची और पत्नी का भरण पोषण नहीं करता। ससुराल वाले एक लाख रुपये दहेज लाने का दबाव डाल रहे हैं। महिला कई दिनों से थाने का चक्कर काट रही है। परिवार परामर्श केंद्र दंपती को साथ रखने की कोशिश के बजाय कोर्ट जाने की सलाह दे रहा है।

केस-2

गोरखनाथ क्षेत्र की महिला को पति मोबाइल फोन से मायके के सदस्यों से बात करने से मना करता है। उसे पत्नी का फेसबुक और व्हाट्सएप पर मैसेज करना पसंद नहीं है। पत्नी ने विरोध किया तो पति रिश्ता खत्म करने के लिए कह रहा है। मामला परिवार परामर्श केंद्र पहुंचा, लेकिन कोई निस्तारण नहीं हो सका। अलबत्ता दोनों पक्षों को रिश्ता खत्म करने की सलाह जरूर मिल गई।

केस -3

राप्तीनगर की रहने वाली महिला का पति से विवाद है। इनके रिश्तों में किसी तीसरे ने जहर घोल दिया है। मामला परिवार परामर्श केंद्र पहुंचा, तो विवाद की जड़ तलाशने के बजाय पत्नी को महिलाओं के गुण की नसीहत देकर घर भेज दिया गया। उधर, पति पत्नी को झगड़ालू बताते हुए साथ रखने के लिए तैयार नहीं है।

परिवार परामर्श केंद्र काउंसलर शिखा साहनी ने कहा कि परिवार परामर्श केंद्र में आए मामलों की काउंसिलिंग की जाती है। इस दौरान दंपती को हर तरह से समझाने की कोशिश की जाती है। कई बार बात बन जाती है, लेकिन कई मामलों में दंपती कुछ नहीं सुनते। ऐसे में दोनों को अलग-अलग रहने की सलाह दी जाती है।
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें