हीरामन कहते हैं कि पत्नी पिंगला भी दिव्यांग हैं। दोनों से तीन बच्चें कुलदीप, रूखमणी और छोटी है। कहा कि दुनिया में सिर्फ एक ही दिव्यंगता है और वह है नकारात्मक सोच। इन्होंने अपनी शारीरिक अक्षमता को कमजोरी नहीं बनने दिया।
जीवन से संघर्ष करो, समझौता नहीं
हिरामन की सोच है कि जीवन से संघर्ष करो, समझौता नहीं और इस सोच को उन्होंने बचपन से ही साकार किया है। वह बताते हैं, अचानक हादसें से बड़े भाई की मौत के बाद मैंने विकलांगता को कभी आड़े नहीं आने दिया। हमेशा उससे संघर्ष करता रहा।