नगर निगम चुनाव को गोरखपुर में भाजपा ने हमेशा पूरी दमदारी से लड़ा है। अपना मेयर बनाने में तो कई बार सफलता मिल चुकी है, लेकिन अब तक बोर्ड बनाने का सपना पूरा नहीं हो सका है। इसके लिए उसे हर बार सपा के प्रत्याशियों से कड़ी चुनौती मिली है। हालांकि, बोर्ड तो सपा भी कभी नहीं बना सकी लेकिन, खेल बिगाड़ने में उसे हर बार सफलता मिलती रही है।
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पिछले तीन चुनाव में सपा प्रत्याशियों से मिलती रही है कड़ी टक्कर
निगम के पिछले तीन चुनाव में बोर्ड बनाने की चर्चा करें तो हर बार भाजपा बोर्ड बनाने के करीब तक पहुंच गई लेकिन निर्दलीय ही सहारा बने। 2006 के निगम चुनाव में परिसीमन के बाद कुल 70 वार्ड के लिए चुनाव हुआ, जिसमें भाजपा के 26 प्रत्याशी ही जीतने में सफल हो सके। उस बार सपा के 24 पार्षद चुने गए थे। उस समय प्रदेश में सपा की सरकार थी। 2017 के चुनाव में भाजपा ने जिताऊ प्रत्याशी के चयन को लेकर काफी सतर्कता बरती तो पार्टी की स्थिति थोड़ी बेहतर हुई। भाजपा को 28 सीटें मिली, जबकि सपा के 21 पार्षद जीतकर सदन में पहुंचे।