फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आजादी की लड़ाई में बुद्ध भूमि का रहा है बड़ा योगदान, अंग्रेजों ने मुखिया को पीटकर निकाला था गांव से बाहर

Thu, 13 Aug 2020 04:26 PM IST
vivek shukla इरफान बाकर, बांसी (सिद्धार्थनगर)।
विज्ञापन
महात्मा बुद्ध। (सांकेतिक फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

बुद्ध भूमि (सिद्धार्थनगर) देश के आजादी की लड़ाई में अपना सबकुछ न्यौछावर करने में किसी भी अंचल से पीछे नहीं रहा। देश को आजाद कराने की भावना से ओतप्रोत कई दीवानों ने हंसते-हंसते अपने आप को कुर्बान कर दिया। 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ, लेकिन इसके लिए हमारे सेनानियों ने जो कीमत चुकाई उसके पीछे गौरवशाली इतिहास है।

विज्ञापन


प्रथम विश्व युद्ध के समाप्ति के बाद स्वतंत्रता आंदोलन को रोकने के लिए सन् 1919 को रालेट एक्ट जैसा काला कानून अंग्रेजों ने देश पर लाद दिया। महात्मा गांधी ने जब इसका विरोध किया तो पूरे देश में विरोध प्रदर्शन और गोलीबारी का दौर शुरू हो गया।

इसी बीच जलियांवाला बाग कांड हुआ, जिसने कश्मीर से कन्याकुमारी तक विरोध की ज्वाला धधक उठी। इसमें सिद्धार्थनगर पीछे नहीं रहा, बांसी नगर में स्थित रतनसेन इंटर कॉलेज में उस समय शिक्षारत सभी छात्र कॉलेज से निकलकर इस आंदोलन में कूद पड़े। खिलाफत आंदोलन भी इसी बीच शुरू हुआ था।

विज्ञापन
विज्ञापन

अंग्रेजों ने किया था अत्याचार

हिंदू मुस्लिम आपस में मिलकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़े। इसी समय बांसी कस्बे से पूरब लगभग पांच किलोमीटर पर बसे तेजगढ़ गांव के लोगों ने पंचायत गठित कर ब्रिटिश सरकार के खिलाफ प्रशासन और शासन शासन स्तर पर अपना विरोध दर्ज कराया। इससे घबराए अंग्रेज सरकार के समर्थक अष्टभुजा प्रसाद ने तेजगढ़ गांव को फूंकवा दिया और पंचायत के मुखिया अयोध्या प्रसाद यादव को पीटकर गांव से निकलवा दिया था।

इसके खिलाफ उसका बाजार, शोहरतगढ़ में विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों का दमन करने के लिए उन्हे पीटा गया कितनों को मालगाड़ी के डिब्बे के नीचे ढकेलकर दबा दिया गया। शोहरतगढ़ में कांग्रेस का दफ्तर जलाया गया।

स्वतंत्रा संग्राम सेनानी पं. परमेश्वर दत्त पांडेय को कोड़ों से पीटकर अधमरा कर छोड़ा गया और आमजन पर घोड़ा दौड़ाया गया। इस जंग ए आजदी की लड़ाई में कुछ लोग शहीद भी हो गए।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें