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Gorakhpur News: सर्द मौसम में शुष्क हवा से जकड़ रहा गला, युवाओं की फूल रही सांस

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- सांस लेने में बेचैनी, घबराहट और थकान के साथ गले में दर्द के बढ़े मामले
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- जिला अस्पताल और एम्स की एमरजेंसी में बढ़ी मरीजों की संख्या
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। ठंड और घने कोहरे में सांस के मरीजों के साथ ही युवाओं की भी सांस फूल रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, युवा सांस फूलने, गले में जकड़न, दर्द और इंफेक्शन के इलाज के लिए जिला अस्पताल और एम्स पहुंच रहे हैं। शनिवार को एमरजेंसी में मरीजों की संख्या काफी दिखाई दी।
वरिष्ठ चेस्ट फिजिशियन डॉ. बीके सुमन ने बताया कि सर्दियों में सांस के मरीजों की संख्या बढ़ने से रोजाना करीब डेढ़ सौ से ज्यादा लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। दिसंबर की शुरुआत से पिछले सप्ताह तक 50 से अधिक और 16 से कम आयु के लोग अधिक आ रहे हैं। इसमें सांस लेने पर गले और सीने में दर्द, थोड़ी दूर पैदल चलने, सुबह जागने या रात में उठने पर सांस फूलने और चक्कर आने की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं।
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डॉक्टर के मुताबिक लगातार कोहरा और उसमें घुले धूल सांस के साथ गले और फेफड़ों में इंफेक्शन की वजह बन रहे हैं। नस, मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने से तकलीफ हो रही है। ऑक्सीजन की भरपूर मात्रा न मिलने से गहरी सांस लेनी पड़ रही है।
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कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रोहित कुमार ने बताया कि सर्दियों में युवाओं की सांस फूलने की वजहों में नशे (बीड़ी, सिगरेट, शराब आदि) के ज्यादा सेवन की आशंका जताई। कहा कि हार्ट अटैक सिर्फ उम्र दराज, डायबिटिक या हाइपरटेंशन के मरीजों तक सीमित नहीं रहा। 30-35 साल तक के युवा भी चपेट में आ रहे हैं। शरीर गर्म रखने के लिए नशा ज्यादा करने से हृदय और फेफड़ों पर जोर पड़ता है।
सर्दियों में रक्त धमनियां सिकुड़ती हैं, इसलिए हार्ट के मरीज बढ़ते हैं। ऐसे में लापरवाही भारी पड़ सकती है।
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बचाव के लिए सुझाव
- बीपी और हार्ट के मरीज दवा नियमित रूप से लें।
- कोहरे में सुबह-शाम ठंडी हवा में टहलने से बचें।
- गर्म कपड़े पहनें। मौसमी फल और सब्जी खाएं।
- बीपी, ब्लड की जांच कराएं।
- सुबह-शाम गुनगुना पानी पिएं, पौष्टिक भोजन खाएं।
- असामान्य लक्षण सांस फूलना, सीने में दर्द, घबराहट, बेचैनी या अत्यधिक पसीना आने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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