कैंपियरगंज, पीपीगंज, जंगल कौड़िया आदि इलाकों में माइक्रो फाइनेंस कंपनियां ज्यादा सक्रिय हैं। यहां सब्जी की खेती और स्व रोजगार को लेकर महिलाएं ज्यादा काम कर रही हैं। सप्ताह भर पहले गांव-गांव में कर्जमाफी की अफवाह ऐसी फैली कि महिलाएं सच मान बैठी और उन्हें लगा कि कर्ज माफ हो जाएगा। अब अधिकारी मोबाइल पर मैसेज भेजकर भ्रामक सूचनाओं से बचने के लिए आगाह कर रहे हैं।
गांव-गांव तक फैले माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के मकड़जाल में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ही नहीं दुकानदार भी फंसकर तबाह हो गए हैं। परिवारवालों की बिना जानकारी के बहुत सारी महिलाओं ने पहले कर्ज लिया और जब ब्याज की रकम नहीं चुका पाई तो दूसरे फाइनेंस कंपनी से और लोन ले लिया। कर्जदार बने लोगों में किसी को खेत बेचनी पड़ी तो किसी ने परिवार के साथ घर ही छोड़ दिया।
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महिलाओं को समझाती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कैंपियरगंज के पंडितपुर गांव में अर्जुन की पत्नी ने डेढ़ साल पहले राधा ने 40 हजार का लोन लिया। कंपनी के लोगों ने इसका ईएमआई बना दिया और हर 15 दिन पर वसूली करने पहुंच जाते थे। ब्याज भी 24 फीसदी सालाना का लगाया। ब्याज बढ़ता गया तो अर्जुन ने दूसरी कंपनी से 40 हजार रुपये लोन लिए।
सिर्फ आधार कार्ड, स्वयं सहायता समूह की गारंटी पर आसानी से ब्याज मिल गया। गांव के लोगों का कहना है कि ब्याज चुकता न होने पर आए दिन लोन देने वाली कंपनियों के एजेंट आते थे और धमकी देते थे। इससे तंग होकर अर्जुन ने पत्नी के साथ घर छोड़ दिया और सिद्धार्थनगर चला गया।
महिलाओं को समझाती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दरअसल, कैंपियरगंज, पीपीगंज, जंगल कौड़िया आदि इलाकों में माइक्रो फाइनेंस कंपनियां ज्यादा सक्रिय हैं। यहां सब्जी की खेती और स्व रोजगार को लेकर महिलाएं ज्यादा काम कर रही हैं। कंपनियों ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं तक पहुंच बनाई और इसके बाद आसानी से लोन देना शुरू कर दिया।
सप्ताह भर पहले गांव-गांव में कर्जमाफी की अफवाह ऐसी फैली कि महिलाएं सच मान बैठी और उन्हें लगा कि कर्ज माफ हो जाएगा। अब अधिकारी मोबाइल पर मैसेज भेजकर भ्रामक सूचनाओं से बचने के लिए आगाह कर रहे हैं।
महिलाओं को समझाती पुलिस
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15 डिस्मिल खेत बेचकर चुकाया कर्ज
महदेवा गांव के अमित गिरि ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से अपनी पत्नी के नाम दो माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से 40-40 हजार रुपये लोन लिया। अमित ने बताया कि उन्होंने दुकान पर कुछ सामान लाया और बाकी खर्च हो गया। 80 हजार रुपये का ब्याज उनसे 3210 रुपये एजेंट लेते थे।
इसके बाद पत्नी ने 40 हजार रुपये का कर्ज एक और कंपनी से ले लिया। इसके बदले में 2200 रुपये ब्याज देना पड़ा। घर का खर्च चलाकर ब्याज देना संभव नहीं हो पा रहा था और कंपनी के लोगों व समूह की संचालिका से परेशान हो गया। फिर 15 डिस्मिल खेत बेचकर दो कंपनियों के रुपये चुकाए। अभी भी कर्ज बाकी है।
मैंने दो माइक्रो फाइनेंस कंपनी से करीब एक लाख का कर्ज लिया था। उनका ब्याज ज्यादा था और उसे चुकता नहीं कर पा रही थी। फिर कुछ समूह वालों से भी उधार लिया। अब जमीन बेचने की नौबत आ गई है। आए दिन फाइनेंस कंपनी वाले धमकी दे रहे हैं। पता चला था कि कर्जमाफी की योजना आई है तो बहुत खुशी हुई। लेकिन गोरखनाथ मंदिर गईं महिलाओं ने बताया कि अफवाह था किसी ने फैलाया है: संयोगिता, रिगौली गांव
महिलाओं को समझाती पुलिस
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पति और बेटी के इलाज के लिए दो बार में दो लाख रुपये लोन लिया। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से फाइनेंस कंपनी से मिला था। पति पेंट-पालिस का काम करते हैं। कंपनी के लोग हर महीने 31 हजार रुपये ब्याज लेने आते थे। कुछ जमीन बेचकर चुकता किया है लेकिन अभी बकाया है: कोकिला, खजुरगांवा गांव
कुछ अवांछित तत्वों ने गोरखनाथ मंदिर में प्राइवेट माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की ओर से दिए गए ऋण माफी के संबंध में भ्रामक सूचना फैलाई गई है। इसके कारण विभिन्न जिलों से ग्रामीण व शहरी क्षेत्र की महिलाएं मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र देने के उद्देश्य से आ रही हैं।
उच्चाधिकारियों एवं प्रशासन की ओर से ऋण माफी के संबंध में महिलाओं को समझाया जा रहा है कि वर्तमान किसी भी प्रकार की कोई योजना प्रस्तावित नहीं है। यह सूचना पूरी तरह भ्रामक एवं गलत है। यदि भविष्य में इस तरह की ऋण माफी की कोई योजना आती है तो जनपद एवं विकास खंड स्तर से अलग से सूचित किया जाएगा: राजेंद्र प्रसाद सिंह, उपायुक्त (स्वतः रोजगार)
महिलाएं मंदिर के गेट तक पहुंच गईं थी महिलाएं
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
व्हाट्सएप ग्रुप पर भेज रहे मैसेज
स्वयं सहायता समूहों के व्हाट्सएप ग्रुपों पर अधिकारियों की ओर से सूचना प्रसारित की जा रही है कि माइक्रो फाइनेंस कंपनी द्वारा लिए गए ऋण और एनआरएलएम योजना में सरकार किसी भी प्रकार का ऋण माफ नहीं कर रही है। वहीं अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि यदि कोई इस प्रकार का अफवाह फैला रहा हो तो उसकी सूचना तुरंत ब्लॉक के अधिकारियों को दी जाए ताकि उनके खिलाफ कार्रवाई कराई जा सके।
जंगल कौड़िया की महिलाएं भी पहुंची गईं थीं गोरखनाथ मंदिर
जंगल कौड़िया। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से लिए गए कर्ज को माफ किए जाने की अफवाह सुनकर जंगल कौड़िया से भी 20 से ज्यादा महिलाएं गोरखनाथ मंदिर पहुंच गईं थीं। केवटलिया गांव की मीरा, उर्मिला, राधिका, किरन, मीरा, पूनम, ज्ञानमती ने बताया कि ब्लॉक के अधिकारियों ने फोन करके समझाया था कि ऐसी कोई योजना नहीं है।
इसके बाद वह लौट आईं। जंगल कौड़िया ब्लाॅक में कुल 650 समूह पंजीकृत हैं जिसके अंतर्गत 9 हजार महिलाएं सक्रिय रूप से कार्य करती हैं। ब्लॉक के अधिकारी मासिक बचत हर महीने जमा कराते रहते है। एडीओ आईएसबी शरद श्रीवास्तव ने बताया व्हाट्सएप ग्रुप और अन्य माध्यमों से समूह सखियों और सदस्यों को बताया जा रहा है कि ऋण माफी की कोई योजना नहीं है।