धरने पर बैठा था दंपती।
- फोटो : अमर उजाला।
सचिव डॉ. वीएन अग्रवाल ने बताया कि मेडिकल बोर्ड नए सिरे से जांच कर डॉक्टरों को दोषी पाता है तो यह मामला उपभोक्ता फोरम में जाएगा। मामले में धारा 420 लगाना पूरी तरह से न्याय संगत नहीं है। डॉक्टरों ने मामले में कोई जालसाजी की ही नहीं है।
यह है मामला
देईपार निवासी अभिषेक पांडेय की गर्भवती पत्नी की जांच में गर्भस्थ शिशु की रिपोर्ट सामान्य आई थी। लेकिन जब बच्चा पैदा हुआ तो उसका एक हाथ नहीं है और सिर भी असामान्य है। इस मामले में चार डॉक्टरों पर मुकदमा दर्ज कराते हुए डायग्नोस्टिक सेंटरों पर कार्रवाई की गई है। साथ ही इन सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों को डीएम के निर्देश पर सील भी कर दिया गया है।