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गोरखपुर का हाल: डीएल चाहिए तो करना होगा दो से तीन महीने का इंतजार, चक्कर काट रहे आवेदक

Wed, 10 May 2023 01:13 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।

सार

परिवहन विभाग के संभागीय निरीक्षक राघव कुशवाहा ने कहा कि बहुत से ऐसे लाइसेंस के आवेदक हैं जिनके लाइसेंस छह महीने बाद भी नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में वह कार्यालय आते हैं, लेकिन यहां कोई ऐसी व्यवस्था नहीं है जिससे हम उनके ड्राइविंग लाइसेंस को ट्रैक कर उन्हें जानकारी दे सकें।
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गोरखपुर आरटीओ कार्यालय। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर जिले में मंगलवार की दोपहर एक से दो बजे के बीच दो आवेदक अपने ड्राइविंग लाइसेंस की जानकारी लेने चरगावां स्थित परिवहन विभाग के चालक प्रशिक्षण केंद्र पहुंचे। उनके लाइसेंस आवेदन के दो महीने बाद भी उनके पते पर नहीं पहुंचे थे। आरआई ने उनके लाइसेंस से संबंधित जानकारी लेते हुए बताया कि यहां से सारी औपचारिकता पूरी कर ली गई हैं, मुख्यालय से लाइसेंस उनके घर भेजे जाएंगे।

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जिले में करीब 10 हजार आवेदकों के ड्राइविंग लाइसेंस दो महीने बाद भी नहीं मिल सके हैं। इनमें कुछ ऐसे भी आवेदक हैं, जिनके लाइसेंस छह माह से मुख्यालय में अटके पड़े हैं। लाइसेंस के बिना हजारों आवेदकों के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। प्रतिदिन पांच से छह लाइसेंस के आवेदक लाइसेंस की जानकारी लेने चरगावां स्थित परिवहन विभाग के चालक प्रशिक्षण केंद्र पहुंच रहे हैं। लेकिन, उनके हाथ निराशा लग रही है।

नियम के तहत डाक के माध्यम से आठ से दस दिन में ड्राइविंग लाइसेंस पहुंच जाना चाहिए, लेकिन पिछले वर्ष के अगस्त माह से ही अभ्यर्थियों को समय से लाइसेंस नहीं मिल रहा है। इससे परेशान आवेदक चालक प्रशिक्षण केंद्र और आरटीओ पहुंच रहे हैं। लेकिन, उनके हाथ सिर्फ निराशा ही लग रही है।
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गोरखपुर जिले के संबंधित अधिकारी और कर्मचारी हाथ खड़े कर दे रहे हैं। उनका कहना है कि जिला मुख्यालय पर सिर्फ टेस्ट लिए जाते हैं। जिले की रिपोर्ट के आधार पर मुख्यालय लखनऊ में स्मार्ट कार्ड के रूप में ड्राइविंग लाइसेंस बनते हैं और अभ्यर्थी के निर्धारित पते पर भेजे जाते हैं। इस कार्य के लिए निजी एजेंसी नामित की गई है। जिले में प्रत्येक दिन लगभग 100 स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस और 25 से 30 ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण होते हैं।


 

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गलत पता के चलते नहीं पहुंचता है लाइसेंस

बहुत से ऐसे लाइसेंस होते हैं जो गलत पता होने के कारण मुख्यालय लौट जाते हैं। समय-समय पर मुख्यालय की ओर से संभागीय परिवहन कार्यालय को वापस हुए लाइसेंस से संबंधित जानकारी भेजी जाती है, आवेदक द्वारा पता परिवर्तन की ऑनलाइन फीस जमा करने के बाद मुख्यालय फिर से लाइसेंस को आवेदक के नए पते पर भेज देता है।

केस एक
भौवापास के शिवम सिंह ने फरवरी में स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए टेस्ट दिया था। टेस्ट में सफल हो गए थे। इसके बाद उनका बायोमेट्रिक ले लिया गया, लेकिन दो माह से अधिक का समय हो गया है, लेकिन अभी तक उन्हें लाइसेंस नहीं मिला है।

केस दो
सुनील श्रीवास्तव ने मार्च के पहले सप्ताह में स्थाई ड्राइविंग लाइसेंस के लिए टेस्ट दिया था। टेस्ट में पास होने के बाद वह अबतक लाइसेंस का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उन तक लाइसेंस नहीं पहुंचा। अब वह चरगावां स्थित आरटीओ दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं।

परिवहन विभाग के संभागीय निरीक्षक राघव कुशवाहा ने कहा कि बहुत से ऐसे लाइसेंस के आवेदक हैं जिनके लाइसेंस छह महीने बाद भी नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में वह कार्यालय आते हैं, लेकिन यहां कोई ऐसी व्यवस्था नहीं है जिससे हम उनके ड्राइविंग लाइसेंस को ट्रैक कर उन्हें जानकारी दे सकें।


 
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