इधर, नेपाल में भारतीय मुद्रा को लेकर स्थानीय और भारतीय पर्यटकों में काफी असमंजस की स्थिति है। नेपाल में भारतीय करेंसी से सामान खरीदना मुश्किल हो गया है। भारतीय मुद्रा को नेपाली मुद्रा में बदलकर पर्यटक नेपाल जा रहे हैं। इस वजह से उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है।
नेपाल भंसार एजेंट डॉ शांत कुमार शर्मा ने बताया कि नेपाली रुपया आधिकारिक तौर पर भारतीय रुपये से जुड़ा है। आरबीआई यात्रियों को 100 रुपये तक के मूल्यवर्ग में किसी भी राशि के लिए मुद्रा नोट ले जाने की अनुमति देता है। जबकि 200 और 500 मूल्यवर्ग के लिए 25,000 की सीमा है।
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नेपाल सरकार ने वर्ष 2020 में 5000 रुपये तक भारतीय मुद्रा को नेपाल लाने की अनुमति दी थी। नेपाल के कारोबारी ज्यादातर भारत से कारोबार करते हैं। इसलिए सोनौली सीमा से पैसा भेजने या ट्रांसपोर्ट में भाड़ा जमा करने के लिए जाना होता है। इस दौरान भारतीय एजेंसियां रुपये के संबंध में कागजी जांच के बाद जाने देती हैं।
व्यापारी सोनू साहू ने बताया कि 25 से 50 हजार रुपये लाने और ले जाने पर दोनों देशों में अधिकारी एवं जांच एजेंसियां जाने देती हैं, लेकिन दो से पांच लाख रुपये ले जाने पर पूछताछ की जाती है। विवरण नहीं देने पर मुद्रा कस्टम विभाग जब्त कर लेता है।
सीमा पर अवैध रूप से मुद्रा के साथ पकड़े जाने पर कस्टम विभाग उक्त रुपये के संबंध में जांच करने के बाद उस पर पेनाल्टी जमा कराकर बरामद रुपये छोड़ देती है।
कस्टम अधीक्षक एसके पटेल ने कहा कि आरबीआई के नियम के अनुसार 25 हजार तक भारतीय मुद्रा नेपाल ले जा सकते हैं और ला सकते हैं। अवैध रास्तों से रुपये लाने और ले जाने पर जब्ती की कार्रवाई की जाती है। मुद्रा बरामदगी के बाद जांच कर पेनाल्टी जमा कराई जाती है। इसके बाद मुद्रा वापस कर दी जाती है।