गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की आवासीय योजना लोहिया एन्क्लेव को टाउनशिप घोषित करने के प्रस्ताव पर प्रमुख सचिव सिंचाई ने जहां मुहर लगा दी, वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी अपनी मंजूरी दे दी है। एनजीटी ने इस मामले में प्रमुख सचिव सिंचाई को नोडल अफसर बनाया था।
टाउनशिप घोषित होने के बाद अब एन्वॉयरमेंटल क्लीयरेंस की बाध्यता खत्म हो गई है। इसी के साथ जीडीए ने इस योजना के सभी आवंटियों को कब्जा देने की तैयारी भी शुरू कर दी है। महीने भर के भीतर लोहिया एन्क्लेव के सभी 450 आवंटियों को कब्जा मिल जाएगा।
दरअसल, एनजीटी की सख्ती के बाद रामगढ़ताल परियोजना क्षेत्र के 500 मीटर के दायरे में आने वाले 20 हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल में निर्माण के लिए एन्वॉयरमेंटल क्लीयरेंस तो उससे कम क्षेत्रफल में निर्माण के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रजामंदी जरूरी है।
जीडीए ने एन्वॉयरमेंटल क्लीयरेंस के लिए आवेदन तो कर दिया था, मगर अनुमति नहीं मिलने की वजह से आवंटियों को कब्जा नहीं मिल पा रहा था। इसका विकल्प तलाशते हुए प्राधिकरण ने लोहिया एन्क्लेव को टाउनशिप घोषित का फैसला किया।
जीडीए ने लोहिया एन्क्लेव को टाउनशिप बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर नोडल अफसर व प्रमुख सचिव सिंचाई के पास भेजा था, जिसे उन्होंने अनुमति दे दी। इसके तत्काल बाद प्राधिकरण ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास भी आवेदन कर दिया और अब बोर्ड ने भी अपनी अनुमति दे दी।
जीडीए सचिव राम सिंह गौतम ने बताया कि लोहिया एन्क्लेव अब टाउनशिप घोषित हो गया है। नोडल अफसर के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भी अनुमति मिल गई है। जल्द ही आवंटियों को कब्जा दिया जाएगा।