सात अगस्त 2005 को जीतनारायण बस्ती जेल से छूट गया। वह जेल से छूटने के बाद संतकबीरनगर के बखिरा के फेउसी निवासी बहनोई गोरेलाल के यहां जाने के लिए निकला। उधर जेल से ही विनोद और उसके साथी पीछा कर रहे थे।
बहनोई के गांव के बाहर जैसे ही जीतनारायण जीप से उतरा और पैदल ही बहनोई के साथ जाने लगा तभी कार सवार विनोद व उसके साथियों ने जीतनारायण को गोलियों से भून दिया।
घटना को अंजाम देकर भाग रहे विनोद के कार पर ग्रामीणों ने पत्थर बरसा दिया, जिससे उसकी कार क्षतिग्रस्त हो गई। उसके बाद पुलिस ने विनोद व उसके साथियों को पीछा कर गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में विनोद के खिलाफ गैंगेस्टर की भी कार्रवाई की गई थी। वर्ष 2015 में विनोद ने उसी मामले में संतकबीरनगर कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। माफिया विनोद पर 38 से अधिक केस दर्ज हैं।