इस समय सामान्य दिनों की तुलना में मौत की संख्या तेजी से बढ़ी है। जिले के तीन घाटों पर 10 दिनों के अंदर 500 से अधिक लोगों की मौत हुई है। दाह संस्कार होने के बाद यह आंकड़ा सामने आने से स्वास्थ्य विभाग भी सकते में है। आंकड़ों की बात करें तो गोला के सरयू घाट पर 10 दिनों के अंदर 218 लोगों का दाह संस्कार हुआ है। इसके अलावा बड़हलगंज में 211 और राप्ती नदी के राजघाट पर 60 शव का दाह संस्कार हुआ है।
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वैसे तो राजघाट पर आंकड़ा 200 के पार बताया जा रहा है, लेकिन इसका रिकॉर्ड नहीं दर्ज है। मौतों के सही कारणों की जानकारी इसलिए नहीं हो पाई है कि इन मौतों का पोस्टमार्टम नहीं हुआ है। लेकिन, यह अंदेशा लोग जरूर जता रहे हैं कि हीट स्ट्रोक या लू भी इन मौतों की बड़ी वजह हो सकती है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरूक करने के साथ इंतजामों पर भी खास ध्यान दे रहा है।
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पीसी शाही ने बताया कि इस बार गर्मी में हार्ट-अटैक के मामले तेजी से बढ़े हैं। हर दिन चार से पांच मरीज हार्ट-अटैक के इमरजेंसी ओपीडी में आ रहे हैं। जबकि, पहले ऐसा नहीं था। जांच के दौरान पता चला कि डिहाइड्रेशन की वजह से यह समस्या हो रही है। क्योंकि, डिहाइड्रेशन में शरीर में पानी की कमी हो जा रही है, जिसकी वजह से दिल की नसें सिकुड़ रही है और इनमें खून के बड़े थक्के जम जा रहे हैं।
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बताया कि आम तौर पर पहले छोटे खून के थक्के होते थे। लेकिन, अब यह थक्के बड़े हो रहे हैं। दिल की नसों की बात करें तो यह थक्के दो से तीन मिलीमीटर के होते हैं। जबकि, गर्मी के कारण इनमें चार से पांच मिलीमीटर के थक्के जम रहे हैं। इससे मरीजों की तत्काल मौत हो जा रही है। ऐसी स्थिति में हृदय के मरीजों को सलाह दी जा रही है कि धूप में न निकलें।
डॉ. पीसी शाही ने बताया कि इस बीच मौत के मामले अधिक सुनाई दे रहे हैं। जबकि, पहले गर्मी में ऐसा नहीं होता था। ऐसी स्थिति में मरीज की मौत के सही कारणों की जानकारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही हो पाएगी। लेकिन, इतना जरूर है कि गर्मी मौत के कारणों में सबसे बड़ा फैक्टर है। बताया कि कोरोना संक्रमित कई मरीजों को हार्ट की दिक्कत हुई है। ऐसे मरीज अभी फालोअप में हैं। इन मरीजों को सलाह दी गई है कि धूप से बचें। क्योंकि, धूप में रहने के दौरान हार्ट-अटैक का खतरा सबसे अधिक रहता है।
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चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. वीएन अग्रवाल ने बताया कि कोरोना के बाद जिनके फेफड़े सिकुड गए हैं। वह अब ठीक नहीं होने वाले हैं। ऐसे मरीजों को अब ताउम्र दवा खानी होगी। इस बीमारी को विज्ञान की भाषा में लंग्स फाइब्रोसिस कहते हैं। ऐसे हर माह 30 मरीजों का फालोअप किया जा रहा है। इनके सांस लेने की क्षमता भी कम हुई है। एक स्वस्थ व्यक्ति एक मिनट में जहां छह लीटर सांस लेता और छोड़ता है।
वहीं, फाइब्रोसिस के मरीज एक मिनट में तीन से चार लीटर सांस ले और छोड़ रहे हैं। उमस और गर्मी से ज्यादा दिक्कत होती है, इसलिए इन मरीजों को सलाह है कि वह शरीर का तापमान स्थिर बनाए रखें। अगर जरा भी दिक्कत होती है, तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं।