डॉ रजनीकांत ने बताया कि 1323 लोगों को दवा खिलाकर शोध किया गया है। इसका महज 214 लोगों पर मामूली दुष्प्रभाव पड़ा है। इनमें मितली (8.9 प्रतिशत), पेट में दर्द (7.3 प्रतिशत), उल्टी (1.5 प्रतिशत), हाइपोग्लाइसीमिया (1.7 प्रतिशत) और कार्डियो (1.9 प्रतिशत) पर प्रभाव पड़ा है, जो बेहद कम हैं। हालांकि दवा खाने वाले लोगों को नियमित ईसीजी करने की सलाह भी दी गई है।
डॉक्टरों की सलाह पर लेनी हैं दवा
डॉ रजनीकांत ने बताया कि हाइड्राक्सीक्लोरोक्वीन दवा खुद से नहीं लेनी है। डॉक्टरों की सलाह पर ही यह दवा दी जाएगी। दवा का सेवन 15 वर्ष से कम के बच्चे बिल्कुल नहीं कर सकते हैं। दवा उन अस्पताल के कर्मियों को भी खिलाई जा सकती हैं, जिनमें कोरोना वायरस के मरीज भर्ती नहीं हैं। इसके अलावा काम कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों को भी यह दवा दी जा सकती है।