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निशुल्क ले स्वास्थ्य विभाग की इस योजना का लाभ, पाएं इनाम

Tue, 01 Dec 2020 01:33 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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परिवार नियोजन के स्थायी साधन पुरुष नसबंदी का विकल्प सुरक्षित भी है और असरदार भी। चंद मिनट में होने वाली पुरुष नसबंदी की सफलता भी 99.5 फीसदी है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्र निर्धारित सेवा दिवसों (एफडीएस) पर, जबकि हौसला साझेदारी योजना के तहत सम्बद्ध निजी अस्पताल भी पुरुष नसबंदी की सुविधा निःशुल्क देते हैं।
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बिना चिरा और टांका (एनएसवी) के पुरुष नसबंदी महज एक छोटा सा ऑपरेशन होता है। यह कहना है मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रीकांत तिवारी का। उन्होंने योग्य दंपतियों से अपील की है कि जिले में चार दिसंबर तक मनाए जाने वाले पुरुष नसबंदी पखवाड़े को सफल बनाएं। इस बार के पखवाड़े की थीम है 'परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी, जीवन में लाएं स्वास्थ्य और खुशहाली।'

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि परामर्श कर पुरुष नसबंदी करवाने के लिए अपेक्षित प्रस्तावित कार्यभार भी निर्धारित किया गया है। इसके अनुसार प्रत्येक ब्लॉक के एचईओ या बीसीपीएम या आशा संगिनी को दो पुरुष नसबंदी, शोध अधिकारी या बीपीएम या एएनएम को दो पुरुष नसबंदी, प्रत्येक शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को दो पुरुष नसबंदी और हौसला साझेदारी योजना के तहत सम्बद्ध सूर्या क्लिनिक को चार दिसंबर के बीच कुल 10 पुरुष नसबंदी करवाने को कहा गया है।
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उन्होंने बताया कि पखवाड़े के दूसरे चरण के दौरान पिपराईच सीएचसी, प्रकाश सर्जिकल और सूर्या क्लिनिक में प्रतिदिन पुरुष नसबंदी की सुविधा उपलब्ध रहेगी। नसबंदी के निर्धारित सेवा दिवसों पर महिला नसबंदी के साथ-साथ पुरुष नसबंदी की भी सुविधा दी जाएगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि पखवाड़े के दूसरे चरण यानी सेवा प्रदायगी चरण के तहत उपलब्धियों की प्रतिदिन की रिपोर्टिंग की जानी है।

भ्रांतियों से दूर रहें: डॉ. नंद कुमार

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी परिवार कल्याण डॉ. नंद कुमार का कहना है कि कुछ लोगों में भ्रांति है कि पुरुष नसबंदी से यौन इच्छा एवं क्षमता पर असर पड़ता है। यह भ्रांति निराधार है। ऐसा कुछ भी नहीं है। पुरुष नसबंदी में केवल शुक्राणुवाहक नलिकाओं को बांध दिया जाता है। यौन इच्छा एवं क्षमता पहले की ही तरह बनी रहती है। उन्होंने बताया कि पखवाड़े के दौरान उत्तर प्रदेश टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (यूपीटीएसयू) के डीएफपीएस और मंडलीय फैमिली प्लानिंग लॉस्जिस्टिक मैनेजर अवनीश चंद्र तकनीकी सहयोग करेंगे।

उन्होंने बताया कि पुरुष नसबंदी के लिए तीन योग्यताएं प्रमुख हैं। पुरुष विवाहित होना चाहिए, उसकी आयु 60 वर्ष या उससे कम हो और दंपति के पास कम से कम एक बच्चा हो जिसकी उम्र एक वर्ष से अधिक हो। उन्होंने यह भी बताया कि पुरुष नसबंदी कराने वाले लाभार्थियों को 2000 रुपये उनके खाते में भेजे जाते हैं। पुरुष नसबंदी के लिए प्रेरक आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी को 300 रुपये दिए जाते हैं। पुरुष नसबंदी के लिए प्रेरित करने वाले गैर सरकारी व्यक्ति को भी 300 रुपये देने का प्रावधान है।
 
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यह भी रखें ध्यान

  • अगर यौन संक्रमण हो या कोई अन्य गंभीर बीमारी हो तो पुरुष नसबंदी नहीं करानी चाहिए। उसके ठीक होने तक या डॉक्टर की सलाह पर ही नसबंदी करवाएं।
  • अगर नसबंदी के कुछ घंटों में जननांगों में सूजन आ जाए, तीन दिन के भीतर बुखार हो जाए या घाव के आसपास दर्द, जलन, मवाद या खून आ जाए तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
  • पुरुष नसबंदी होने के कम से कम तीन महीने तक कंडोम का प्रयोग करना चाहिए, जब तक शुक्राणु पूरे प्रजनन तंत्र से खत्म न हो जाएं।
  • नसबंदी के तीन महीने के बाद वीर्य की जांच करानी चाहिए। जांच में शुक्राणु न पाए जाने की दशा में ही नसबंदी को सफल माना जाता है।
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