फोरलेन सड़क बनाने की स्वीकृति 2016 में मिली थी। 1870 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस सड़क का निर्माण वर्ष 2017 से शुरू हुआ। मार्च 2019 में काम पूरा हो जाना था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसका 57 फीसदी काम होना अब भी बाकी है। अब दिसंबर 2021 निर्माण की अंतिम तारीख बताई जा रही है। यह कैसे संभव हो पाएगा, इसपर अफसर, ठेकेदार कुछ खुलकर नहीं बोल रहे हैं।
धार्मिक, सांस्कृतिक लिहाज से भी सड़क महत्वपूर्ण
धार्मिक, सांस्कृतिक, पर्यटन और सामरिक दृष्टि से गोरखपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग बहुत महत्वपूर्ण है। यह सड़क बाबा विश्वनाथ और गुरु गोरखनाथ की नगरियों को आपस में जोड़ती है। नेपाल जाने वाले तमाम सैलानी इसी मार्ग से आते-जाते हैं। सोनौली से नेपाल आना-जाना होता है। खाद्य सामग्री, ईंधन भी इसी रास्ते भेजा जाता है।
एनएचएआई परियोजना प्रबंधक श्रीप्रकाश पाठक ने बताया कि गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन का काम मार्च 2019 में पूरा होना था लेकिन फर्म सही ढंग से काम नहीं कर सकी। मार्च 2021 तक एक लेन का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है। दिसंबर 2021 तक सड़क का निर्माण कार्य पूरा करा लिया जाएगा।
जिला पंचायत सदस्य पंकज शाही ने बताया कि इस सड़क पर इतने गड्ढे हैं कि स्वस्थ आदमी भी बीमार हो जाएगा। किसी को जनता की समस्याओं से कुछ लेना देना नहीं है। 60 किलोमीटर लंबी सड़क के आसपास लाखों की आबादी रहती है। सबका गोरखपुर आना-जाना होता है। समस्या से कब निजात मिलेगी, कोई बताने वाला नहीं है।
देवरिया जाकर आते हैं गोरखपुर
कारोबारी मनोज पाठक ने बताया कि हाटाबाजार में कारोबार है। गोरखपुर आना मजबूरी है। एनएच 29 की यात्रा कठिन है। लिहाजा, देवरिया केरुद्रपुर जाते हैं, फिर अंदर के रास्तों से गोरखपुर पहुंचते हैं। दूरी ज्यादा पड़ती है, लेकिन सुरक्षित है। सड़क बनवाने वाली फर्म के खिलाफ सख्ती जरूरी है।
जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जरूरत
कारोबारी मनोज जायसवाल ने बताया कि ठेकेदार जब काम नहीं करा रहा है तो जनप्रतिनिधियों को आवाज उठनी चाहिए। किसी जनप्रतिनिधि ने आवाज नहीं उठाई। अफसर भी सन्नाटा मारे हैं। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री आकर सड़क का निर्माण कराएंगे तो चल चुकी शासन-सत्ता। सड़क की बदहाली के जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। तभी निर्माण पूरा होगा।