कोरोना महामारी से विद्यार्थियों को बचाने के लिए सीबीएसई और सीआईएससीई की तर्ज पर यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा भी निरस्त कर दी गई है। प्रदेश सरकार के इस फैसले का अभिभावकों, प्रधानाचार्यों और विद्यार्थियों ने स्वागत किया है। सभी ने एक स्वर में कहा कि कोरोना की दहशत के बीच परीक्षा देना चुनौतीपूर्ण था।
अगर परीक्षा के समय को आगे बढ़ाया जाता तो आगे चलकर इंजीनियरिंग या मेडिकल सरीखी प्रतियोगी परीक्षाओं के समय से आयोजन पर खतरा मंडराता। निश्चित रूप से इन कक्षाओं में चढ़ने वाले नंबर जीवन पर्यंत आप के काम आते हैं, मगर जीवन ही नहीं रहेगा तो अंक लेकर कोई क्या करेगा। थोड़ी निराशा हुई है मगर सरकार के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं रहा है। सरकार विद्यार्थियों को प्रमोट करने के लिए जो नियम बनाए, उसमें थोड़ी नरमी बरते।
तो सिर्फ पछतावा ही हाथ लगता
एमजी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य ओपी सिंह ने बताया कि मनुष्य परिस्थितियों का दास होता है। विद्यार्थियों का जीवन परीक्षा से महत्वपूर्ण है। निसंदेह अन्य विकल्प थे मगर उनमें भी खतरा हो सकता था। अगर एक भी विद्यार्थी संक्रमित हो जाता तो पछताने के अलावा कोई विकल्प न बचता।