सबसे ज्यादा दिक्कत आसपास रहने वाले लोगों को हो रही है। दुर्गंध से लोगों का रहना मुश्किल हो गया है। रविवार को अपराह्न पौने तीन बजे बहरामपुर दक्षिणी निवासी रामकिशुन पुल के पास मिल गए। वह कार्तिक पूर्णिमा में लगने वाले मेले की तैयारी देखने आए थे।
बोले-दुश्ववारियों के बीच जीने की आदत सी हो गई है। बस डर इस बात का है कि कहीं इससे कोई बीमारी न हो जाए। वहीं, सुरेश चौधरी का कहना था कि नगर निगम के कर्मचारी कूड़ा लाकर एकला बंधे पर गिराते हैं। इससे वहां से उठने वाली दुर्गंध से परेशान रहते हैं। अब तालाब की बदबू के कारण आसपास रहने वाले लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो गया है।
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आधा दर्जन गांव के लोग है परेशान
एकला बंधे पर करीब एक किलोमीटर तक कूड़े का टीला बना हुआ है। उससे उठने वाली दुर्गंध से आसपास के आधा दर्जन गांवों के लोगों का जीना मुश्किल हो चुका है। बलरामपुर दक्षिणी, एकला, नौसड़, बगिया टोला, पिपरी व बाघागाड़ा आदि गांव के रहने वाले लोग दुर्गंध से परेशान रहते हैं।
पुल पर पहुंचते ही बाइक की गति बढ़ा दे रहे राहगीर
कृत्रिम पोखरे से उठने वाली दुर्गंध से बचने के लिए राहगीर, राजघाट पुल के समीप पहुंचते ही बाइक की गति बढ़ा दे रहे हैं। नौसड़ के रहने वाले रमेश कुमार साहनी ने बताया कि दुर्गंध से बचने के लिए जब वह पुल के समीप पहुंचते है तो बाइक की गति बढ़ा देते हैं और सांस रोककर पार करने की कोशिश करते हैं। बहुत बदबू होता है।
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लोग बोले
कूड़े के दुर्गंध को सहते-सहते अब उसी में जीने की आदत पड़ गई है। कृत्रिम पोखरे में पानी और उसमें पड़े सामान के सड़ने से उठ रही दुर्गंध से बहुत दिक्कतें हो रही है। नगर निगम इसे तत्काल साफ कराए।
-राजकुमार, बीडीसी, बहरामपुर दक्षिणी।
विसर्जन समाप्त होने के बाद नगर नगर को कृत्रिम पोखरे को पाट देना चाहिए, लेकिन उसकी सफाई तक नहीं कराई गई। इसके चलते उससे दुर्गंध उठनी शुरू हो गई है।
-सुनील, चकला अव्वल, अमरूतानी मंडी।
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कार्तिक पूर्णिमा के नहान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सोमवार को राप्ती नदी में स्नान करने पहुंचेंगे। ऐसे में कृत्रिम पोखरे से उठ रही दुर्गंध का सामना उनको करना पड़ेगा।
-श्रवण, बहरामपुर।
हवा चलने पर यह दुर्गंध दो-तीन किलोमीटर दूर तक पहुंच रहा है। दुर्गंध के चलते घर में भोजन करना और रहना मुहाल हो गया है। इससे स्थानीय लोगों का जीवन नारकीय बना हुआ है।
-विशाल, बहरामपुर।
फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि बदबू से सांस के रोगियों की दिक्कतें बढ़ जाएंगी। अगल-बगल रहने वालों के पाचन क्रिया में भी दिक्क्त हो सकती है। मास्क लगाकर रहें और दरवाजा-खिड़की बंद करके रहें।