गोरखपुर रेलवे स्टेशन के प्राचीन दस्तावेजों में फर्स्ट क्लास कोच की तस्वीर।
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बहुत कम ही लोग जानते होंगे कि सवा सौ साल पूर्व चलती ट्रेन के फर्स्ट क्लास कोच में यात्री हुक्का पीते थे और हेड टीटीई उन्हें आकर सलाम भी ठोंकते थे। फर्स्ट क्लास कोच में सफर करने वाले यात्रियों का अलग रुतबा होता था। रेलवे स्टाफ उन्हें साहब कहकर बुलाते थे। ज्यादातर अंग्रेज ही इसमें सफर करते थे।
रेलवे के पास मौजूद दस्तवेजों में इस तरह की दुर्लभ तस्वीर मौजूद है जो 1900 से 1905 के बीच की है। कोच में हुक्का रखा होता था, चिलम अपना इस्तेमाल करना पड़ता था। कोच में चार और दो सीट का कूपा होता था। कोच में दो कूपे पर एक कर्मचारी की ड्यूटी लगती थी जो साहबों की सेवा करते थे।
यही नहीं पूरा प्रोटोकॉल मेंटेन होता था। कोच में ही मोची आकर बूट पॉलिश करते थे। इस कोच के यात्रियों के लिए स्पेशल भोजन बनकर आता था।