अंग्रेजों के समय स्थापित 136 साल पुराने रेलवे के पहले हिंदी प्रिंटिंग प्रेस में छपाई बंद हो गई है। यह प्रेस इतिहास का हिस्सा बन गया है। अब इस प्रेस में बाहर से छपाई कराकर सामग्री विभागों में भेजा जाता है, मशीनों को ढ़क कर रख दिया गया है।
पूर्वोत्तर रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक 1,884 में इस प्रेस की स्थापना गोरखपुर में हुई थी। इसके पहले का प्रेस मुजफ्फरपुर बिहार में था। लंबे समय तक रेलवे के दूसरी जोन के फॉर्म और जरूरी कागजात की छपाई भी यहीं होती थी।
प्रेस में छपाई बंद होने के बाद यहां कार्यरत करीब डेढ़ सौ कर्मचारियों को दूसरे विभागों में भेज दिया गया है। रेलवे प्रेस में रेल टिकट, ईएफटी, पास रसीद, स्टेशनरी, ब्रोशर आदि सामग्रियों की छपाई की जाती थी।