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अब इतिहास का हिस्सा बन गया गोरखपुर में स्थापित रेलवे का पहला हिंदी प्रेस, जानें अब क्या होता है यहां

Sun, 31 May 2020 05:58 PM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।
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रेलवे प्रेस मशीन। - फोटो : अमर उजाला।
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अंग्रेजों के समय स्थापित 136 साल पुराने रेलवे के पहले हिंदी प्रिंटिंग प्रेस में छपाई बंद हो गई है। यह प्रेस इतिहास का हिस्सा बन गया है। अब इस प्रेस में बाहर से छपाई कराकर सामग्री विभागों में भेजा जाता है, मशीनों को ढ़क कर रख दिया गया है।

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पूर्वोत्तर रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक 1,884 में इस प्रेस की स्थापना गोरखपुर में हुई थी। इसके पहले का प्रेस मुजफ्फरपुर बिहार में था। लंबे समय तक रेलवे के दूसरी जोन के फॉर्म और जरूरी कागजात की छपाई भी यहीं होती थी।

प्रेस में छपाई बंद होने के बाद यहां कार्यरत करीब डेढ़ सौ कर्मचारियों को दूसरे विभागों में भेज दिया गया है। रेलवे प्रेस में रेल टिकट, ईएफटी, पास रसीद, स्टेशनरी, ब्रोशर आदि सामग्रियों की छपाई की जाती थी।

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रेलवे प्रेस का इतिहास

ब्रिटिश हुकूमत में वर्ष 1984 में मुजफ्फरपुर स्थित प्रिंटिंग प्रेस को गोरखपुर में शिफ्ट किया गया इसके बाद यहां से हिंदी में छपाई शुरू हो गई। 31 मई 1955 तक इस प्रेस का प्रशासनिक नियंत्रण मुख्य वाणिज्य अधीक्षक के हाथ में था।

14 अप्रैल 1952 में पूर्वोत्तर रेलवे का जब गठन हुआ तब प्रेस पूर्वोत्तर रेलवे के अधीन में काम करने लगा। उस दौर में इस रेलवे से एनएफ रेलवे और इसी रेलवे के भी कागजातों की छपाई होती थी। जानकार बताते हैं कि 80 के दशक तक यहां 4000 से ज्यादा कर्मचारी कार्य थे लेकिन धीरे-धीरे आउटसोर्सिंग का काम बढ़ने लगा और कर्मचारियों की तादाद कम होने लगी।

रेलवे प्रेस के बंद होने के पहले यहां सिर्फ करीब डेढ़ सौ कर्मचारी ही कार्यरत रह गए। जुलाई 2018 में यह प्रेस इतिहास का हिस्सा बन गया।
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