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Gorakhpur News: लिवर के लिए मोटापा शराब से अधिक घातक, किशोर भी हो रहे शिकार

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विशेषज्ञ बोले- पहले 60 की उम्र में दिखने वाली बीमारी अब 20 साल वालों में आम
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गोरखपुर। बढ़ते मोटापे ने लिवर की सेहत के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। इसकी सबसे खास वजह खाने की अधिकता और शारीरिक गतिविधियों में कमी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब लिवर को शराब से अधिक नुकसान फैट से पहुंच रहा है। पहले जो लिवर की बीमारी 60 साल की उम्र के बाद दिखाई देती थी, अब 18 से 25 वर्ष के युवाओं में भी मिल रही है।
गोरखपुर में चल रहे प्रदेश स्तरीय गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी सम्मेलन में इस पर गंभीर चर्चा हुई। एसजीपीजीआई लखनऊ के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डाॅ. पुनीत मेहरोत्रा ने बताया कि मोटापा लिवर में फैट जमा होने की शुरुआत करता है, जिसे फैटी लिवर डिजीज कहा जाता है। यह स्थिति धीरे-धीरे लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर का कारण बन सकती है। पहले यह समस्या शराब पीने वालों में देखी जाती थी लेकिन अब बिना शराब के सेवन के भी लिवर फेल्योर के मामले बढ़ रहे हैं।
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जीबी पंत अस्पताल दिल्ली के डॉ. अजय चौधरी ने कहा कि किशोरावस्था में जंक फूड, मीठे पेय और निष्क्रिय जीवनशैली (फिजिकल एक्टिविटी की कमी) इसका प्रमुख कारण है। अगर खानपान और जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत वाले मरीजों की संख्या दोगुनी हो सकती है।
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लखनऊ से आए गैस्ट्रो विशेषज्ञ डॉ. आरपी सिंह ने कहा कि समय रहते ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और वजन को नियंत्रित रखना जरूरी है। रोजाना 30 मिनट व्यायाम, हरी सब्जियां, फल और पर्याप्त पानी लिवर को स्वस्थ रखने के आसान उपाय हैं। विशेषज्ञों ने युवाओं से अपील की कि वे अपने खानपान में संयम बरतें, क्योंकि मोटापा अब शराब से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है।
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