रेबिज से बचाव के लिए खोजा गया नया इंजेक्शन रेविशील्ड
देशभर के 15 अस्पतालों में किया गया अध्ययन, एम्स के डॉ. हीरा लाल भल्ला भी शामिल थे अध्ययन दल में
मोनोक्लोनल एंटीबॉडी और वैक्सीन का संयोजन सुरक्षित और 98 प्रतिशत प्रभावी
गोरखपुर। जुनोटिक डिजीज (जानवर से इंसान में फैलने वाली बीमारी) रेबिज पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एक और इंजेक्शन खोजा गया है। नाम है रेविशील्ड। भारत के 15 बड़े अस्पतालों में इसके प्रभाव को लेकर एक साल तक अध्ययन किया गया। इसमें एम्स गोरखपुर के फार्माकोलॉजी विभाग के प्रो. हीरा लाल भल्ला भी शामिल थे। यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पत्रिका ''''द लैंसेट'''' में भी प्रकाशित हुआ है।
डॉ भल्ला ने बताया कि अध्ययन में 2019 से 2022 तक कुल 4059 मरीजों को शामिल किया गया, जिसमें 3993 पुरुष और 993 महिलाएं शामिल थीं। मरीजों को दो वर्गाें में बांटकर रेविशिल्ड (आरएमएबी) और इरिक (अश्व रेबिज इम्युनोग्लोबुलिन) देने के साथ दोनों को वैक्सीन भी लगाई गई। एक साल तक फॉलोअप करके देखा गया। किसी भी मरीज को रेबिज नहीं हुआ ना ही कोई गंभीर साइड इफेक्ट दिखा। इसमें पाया गया कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (रेविशिल्ड) और रेबिज वैक्सीन को साथ देने से मरीजों को लंबे समय तक सुरक्षा मिलती है।
-
गंभीर मामलों में भी है प्रभावी, आपूर्ति भी होगी आसान
डॉ. हीरा लाल ने बताया कि अभी तक गंभीर मामलों (कैटेगरी-3) में रेबिज वैक्सीन के साथ एरिग नाम की दवा दी जाती है, जो घोड़े के खून से बनती है। इसकी आपूर्ति सीमित है और एलर्जी का खतरा होता है। वहीं, रेविशिल्ड इंजेक्शन आधुनिक बायोटेक्नोलॉजी से तैयार मोनोक्लोनल एंटीबॉडी है। यह लैब में तैयार होती है और हर जगह आसानी से उपलब्ध हो सकती है। यह ग्लाइकोप्रोटीन के एक संरक्षित हिस्से को लक्ष्य बनाकर आम रूप से पाए जाने वाले स्ट्रेनों को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय करता है।
-
चोट वाले स्थान पर लगेगा यह इंजेक्शन
रेबिज का इंजेक्शन संसाधन बचाने वाला होगा, क्योंकि इसे जानवर जिस स्थान पर काटता है, वहां बने घाव के स्थान पर ही प्रयोग में लाया जाएगा। डॉ. हीरालाल भल्ला ने बताया कि रेबिज का संक्रमण होने पर तंत्रिका तंत्र पर असर होता है, जिसका असर मस्तिष्क पर भी होता है। घाव वाले स्थान पर ही इंजेक्शन के इस्तेमाल से संक्रमण को रोकना अधिक आसान व असरकारक होगा।
कोट
यह उपलब्धि हमारे संकाय की प्रतिबद्धता, विशेषज्ञता और टीम भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। प्रो. भल्ला का योगदान न केवल एम्स गोरखपुर बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। यह अध्ययन रेबिज की रोकथाम में वैश्विक स्तर पर रणनीति को मजबूत करेगा।
डॉ. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक, एम्स