पूर्व विधायक केदारनाथ सिंह के बंगला परिसर प्रकरण में नहीं थम रही रार
गोरखपुर। पूर्व विधायक केदारनाथ सिंह के बंगला और परिसर को खाली कराने को लेकर सैंथवार मल्ल महासभा के पदाधिकारियों और फ्री होल्ड कराने वाले तनुज जालान व अवधेश श्रीवास्तव के बीच चल रही तनातनी बढ़ गई है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गलत जानकारी देने के आरोप लगाए हैं।
झांसे में रखकर जमीन को फ्री-होल्ड कराया गया
सैंथवार मल्ल महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गंगा सिंह सैंथवार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि पूर्व विधायक केदारनाथ सिंह को लीज पर जमीन मिली थी, इसलिए फ्री होल्ड कराने का पहला हक उनका था। शर्त-समझौते के झांसे में रखकर जालान परिवार ने जमीन को फ्री होल्ड करा लिया। पूर्व विधायक जीएम सिंह पर रुपये मांगने के आरोप गलत हैं। दिवंगत केदारनाथ सिंह की मूर्ति को चोरी से स्थापित करने का आरोप भी मनगढ़ंत है। उन्होंने सीएम से जालान परिवार की संपत्ति की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
25 साल से तो हुआ उत्पीड़न, पूर्व विधायक ने मांगे थे रुपये
जमीन को फ्री होल्ड कराने वाले तनुज जालान ने सैंथवार मल्ल महासभा के सारे आरोपों को खारिज कर दिया। कहा कि 25 साल से उनका उत्पीड़न हुआ है। मामूली किराया देते थे और दुकानें खुलवाकर लाखों कमाते थे। तीन साल से बिजली का बिल नहीं जमा है, उसका छह लाख बकाया है। उन्होंने आरोपों का जवाब देते हुए कहा-पूर्व विधायक जीएम सिंह ने इस मामले में रुपये मांगे थे लेकिन मैंने मना कर दिया। विधायक महेंद्र पाल सिंह ने समझौता की पहल कर फ्लैट और 25 लाख रुपये देने का प्रस्ताव दिया था जिसे हमने स्वीकार कर लिया। उन्होंने समाज के लोगों को बुलाकर हंगामा शुरू कर दिया। शर्त उन्होंने तोड़ा है। केस करने और जांच कराने की मांग के लिए वे लोग स्वतंत्र हैं। मैं अपनी जगह सही हूं, इसलिए किसी धमकी से डरना वाला हूं।
मुझ पर रुपये मांगने के आरोप गलत : जीएम सिंह
पूर्व विधायक जीएम सिंह ने शुक्रवार को पत्रकारवार्ता कर कहा कि ओमप्रकाश जालान परिवार की ओर से उन पर रुपये मांगने के आरोप गलत हैं। वर्ष 2012 से 25 अगस्त 2025 तक उनकी मुलाकात उस परिवार के लोगों से नहीं हुई और न ही बात। विधायक महेंद्र पाल सिह ने वार्ता कराकर आपसी सहमति बनाने का प्रयास किया था और फ्लैट व 25 लाख देने की बात हुई थी, लेकिन जालान परिवार ने चालाकी से सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक मामले को लटकाए रखा और फिर मुकर गए। प्रदेश व केंद्र सरकार से जांच कराने की मांग की जाएगी। जरूरत पड़ी तो पीआईएल दाखिल की जाएगी।