डीडीयू में वरिष्ठता सूची जारी होने के बाद ठनने लगी है रार
सेवाएं जोड़े जाने के लिए दोहरी व्यवस्था का लगाया आरोप
गोरखपुर। दीनदयाल उपााध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में जारी अनंतिम वरिष्ठता सूची पर रार सामने आने लगी है। इसे लेकर बुधवार को डीडीयू एससी-एसटी कर्मचारी कल्याण संघ के पदाधिकारियों व सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल अध्यक्ष प्रो. गोपाल प्रसाद के नेतृत्व में कुलपति प्रो. पूनम टंडन से मिला। इस दौरान उन्होंने समाजशास्त्र की प्रो. सुभी धुसिया की वरिष्ठता का मुद्दा उठाया।
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि कुछ प्रोफेसरों की सेवाएं जोड़े जाने के लिए नियमों को दरकिनार किया गया है। विश्वविद्यालय के संविधान में इस बात का उल्लेख है कि किसी शिक्षक की किसी दूसरे संस्थान में एक साल से कम सेवा है तो वह नहीं जुड़ेगी। सूची में समाजशास्त्र की प्रो. सुभी धुसिया से जिस शिक्षक को वरिष्ठ बताया गया है, उन्होंने दूसरे संस्थान में एक साल की सेवा पूरी नहीं की थी। इससे प्रो. सुभी धुसिया की वरिष्ठता प्रभावित हुई है। प्रो. गोपाल प्रसाद के मुताबिक, कुलपति ने आश्वासन दिया कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। नियमानुसार जो होगा, वह किया जाएगा।
इससे पूर्व एससी-एसटी कर्मचारी कल्याण संघ की बैठक हुई। बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि प्रो. सुभी धुसिया को विभागाध्यक्ष पद से नियम विरुद्ध तरीके से हटाया गया था। इस मामले को संगठन द्वारा कुलपति के समक्ष उठाया जाएगा। इस दौरान पूर्व अध्यक्ष प्रो. आलोक गोयल, डॉ बृजेश कुमार, डॉ जितेन्द्र कुमार, अर्जुन सोनकर व प्रवीन राना आदि मौजूद रहे।
....
सात जुलाई को जारी हुई थी अनंतिम वरिष्ठता सूची
डीडीयू में करीब साढ़े तीन साल बाद शिक्षकों की वरिष्ठता सूची 7 जुलाई को जारी हुई थी। इसके बाद ही चर्चाएं तेज हो गई थीं कि नई सूची में कई शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित हुई है। इसे लेकर विज्ञान, कला और वाणिज्य संकाय में विरोध के स्वर भी मुखर होने लगे हैं। डीडीयू प्रशासन ने कोई त्रुटि या विसंगति होने पर एक महीने में आपत्तियां मांगी हैं।