पीड़ित ने बताया कि फेसबुक पर ‘निधि मिश्रा’ नाम से एक अज्ञात फ्रेंड रिक्वेस्ट प्राप्त हुई थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। इसके बाद उसने उनका व्हाट्सएप नंबर ले लिया और कॉल कर संपर्क किया। बातचीत के दौरान उन्हें ट्रेडिंग के जरिये अधिक मुनाफा कमाने का लालच दिया गया और व्हाट्सएप पर हिजकॉइन शॉप नामक लिंक भेजा गया।
कैंपियरगंज थाना क्षेत्र के एक युवक के साथ 18 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। फेसबुक पर लड़की की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने के बाद युवक आनंद प्रकाश ने ट्रेडिंग के झांसे में रुपये ट्रांसफर कर दिए। पीड़ित की तहरीर पर साइबर थाने की पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ आईटी एक्ट व संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच कर रही है।
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जानकारी के अनुसार, कैंपियरगंज थाना क्षेत्र के सहावनखोर गांव निवासी आनंद प्रकाश यादव साइबर ठगी के शिकार हुए हैं। आनंद ने बताया कि 22 जनवरी से 31 जनवरी के बीच ट्रेडिंग के नाम पर उनसे कुल 18 लाख रुपये की ठगी की गई।
बताया कि उन्हें फेसबुक पर ‘निधि मिश्रा’ नाम से एक अज्ञात फ्रेंड रिक्वेस्ट प्राप्त हुई थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। इसके बाद उसने उनका व्हाट्सएप नंबर ले लिया और कॉल कर संपर्क किया। बातचीत के दौरान उन्हें ट्रेडिंग के जरिये अधिक मुनाफा कमाने का लालच दिया गया और व्हाट्सएप पर हिजकॉइन शॉप नामक लिंक भेजा गया।
लिंक के माध्यम से उन्होंने एक आईडी बनाई। कथित ‘निधि मिश्रा’ ने बताया कि ‘हर्ष गोयंका’ नामक व्यक्ति ट्रेडिंग कराते हैं और भारी मुनाफा दिलाते हैं। आरोप है कि उसके कहने पर पीड़ित ने शुरुआत में 50 हजार रुपये निवेश किए। कुछ समय बाद आरोपियों ने झांसा दिया कि उन्हें 57 लाख रुपये का लाभ हुआ है लेकिन राशि खाते में भेजने से पहले 18 लाख रुपये कमीशन के रूप में जमा करने होंगे।
झांसे में आकर पीड़ित ने बैंक ऑफ बड़ौदा, यूको बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और भारतीय स्टेट बैंक समेत विभिन्न बैंकों के खातों में आरटीजीएस, यूपीआई और अन्य माध्यमों से कई किस्तों में कुल 18 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। आरोप है कि भुगतान के बाद भी न तो मुनाफे की रकम मिली और न ही आरोपियों से संपर्क हो सका।
धोखाधड़ी का अहसास होने पर पीड़ित ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई।
एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल ने बताया कि अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ आईटी एक्ट व संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। साइबर सेल बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के जरिये आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।
पहले भी आ चुके हैं मामले
केस 1 : ट्रेडिंग के नाम पर 39 लाख की जालसाजी
ट्रेडिंग के जाल में फंसाकर अधिक मुनाफे का लालच देकर जालसाज ने 39 लाख रुपये की जालसाजी की थी। गोरखनाथ क्षेत्र के राजेंद्रनगर निवासी आनंद श्रीवास्तव से व्हाट्सएप के माध्यम से शार्दुल जैन नाम के व्यक्ति ने संपर्क किया था।
उसने लालच दिया कि एप से अगर ट्रेडिंग किए तो प्रतिदिन 500-1400 प्रतिशत तक फायदा होगा। उसके कहने पर एबंस प्रो एप डाउनलोड किया। इसके बाद 29 जनवरी से 12 फरवरी 2025 तक 44 लाख रुपये उसके दिए खाते में जमा किए। काम पड़ने पर इसमें से पांच लाख रुपये निकाले। इसके बाद और रुपये निकालने के लिए 13 लाख रुपये जमा करने के लिए कहा गया। तब जालसाजी का अहसास हुआ।
केस 2 : युवक से की थी 16 लाख की ठगी
ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश में भारी मुनाफे का लालच देकर साइबर ठगों ने एक युवक से करीब 16 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर ली थी। पीड़ित की शिकायत पर कोतवाली थाने में नौ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर गई थी। पीड़ित अमन पांडेय ने बताया कि उन्हें व्हाट्सएप पर “93 डीबीएस एनेलिस्ट फोरम” नामक एक ग्रुप में जोड़ा गया। इस ग्रुप में रोजाना ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट से जुड़े टिप्स दिए जाते थे।
साइबर ठगी से बचाव के उपाय
मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड रखें, फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करें।
ओटीपी, पिन, सीवीवी या बैंक विवरण किसी से साझा न करें।
अनजान लिंक, ईमेल और कॉल से सावधान रहें।
केवल आधिकारिक बैंक एप/वेबसाइट का उपयोग करें।
पब्लिक वाईफाई पर ऑनलाइन लेन-देन न करें।
मोबाइल और कंप्यूटर को नियमित रूप से अपडेट रखें।
संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत करें।