पिपराइच इलाके के बरईपार गांव में रोजाना 300 क्विंटल कृत्रिम पनीर की चल रही थी फैक्टरी
दूध की जगह धंधेबाज मिल्क पाउडर, फैट के लिए रिफाइंड ऑयल का करते थे इस्तेमाल
गोरखपुर। पिपराइच इलाके के बरईपार गांव में हर रात करीब 300 क्विंटल कृत्रिम पनीर बनता था। इसे आठ पिकअप गाड़ियों से गोरखपुर-बस्ती मंडल के जिलों में भेजा जाता था। आप इस बात से ही अंदाजा लगा सकते हैं कि गोरखपुर शहर से यहां हर दिन करीब चार लाख रुपये का मिल्क पाउडर आ रहा था। हरियाणा के मेवात से आए पांच धंधेबाज कारीगर और स्थानीय मजदूर मिलकर रात में यह फैक्टरी चलाते थे।
मालिक और दो कारीगरों के पकड़े जाने के बाद अब इस पनीर को खपाने वालों की भी धरपकड़ होगी। इसके लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने उनकी कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है।
बीते 20 मई की देर शाम खाद्य सुरक्षा विभाग ने पिपराइच क्षेत्र के बरईपार में छापा मारकर केमिकल से तैयार ढाई क्विंटल पनीर व 800 लीटर दूध पकड़ा था। मौके से कृत्रिम दूध बनाने के लिए रखे पाउडर व करीब 10 प्रकार के केमिकल को भी जब्त किया गया था। मिल्क पाउडर व अन्य केमिकल से तैयार दूध प्लास्टिक की टंकियों में भरा था, जिसे बहा दिया गया था, जबकि पनीर को गड्ढा खोदकर नष्ट कराया गया था।
इस अवैध फैक्टरी को बीते दो मई को भी छापा मारकर बंद कराया गया था। फिर भी यहां रात में काम चल रहा था। यहां रात में तैयार पनीर को भोर में पिकअप से गोरखपुर शहर के अलावा पड़ोसी जिलों महराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, बस्ती, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर की बड़ी-बड़ी दुकानों पर भेज दिया जाता था। जिस जगह कारखाना संचालित होता था, वहां दिन में सन्नाटा रहता था, इसलिए किसी की नजर नहीं पड़ती थी।
डेयरी खोलकर जमाया भरोसा, फिर बन गया धंधेबाज
बरईपार गांव निवासी खालिद ने करीब एक साल पहले डेयरी खोली। दूध से वह पनीर बनाने का काम करने लगा। लेकिन, जल्द ही उसने दिल्ली में काम करने हरियाणा के मेवात निवासी पनीर बनाने के धंधेबाज कारीगराें को बुला लिया। डेयरी होने की वजह से लोगों को शुरुआत में लगा कि यह शुद्ध दूध का पनीर बनाता है, इसीलिए उसकी बिक्री तेजी से बढ़ी। जल्द ही खालिद ने महराजगंज और कुशीनगर के अलावा गोरखपुर के खजनी इलाके में भी पनीर पहुंचाना शुरू कर दिया।
दिवाली में बढ़ी मांग, हर दिन आने लगा चार लाख का पाउडर
बीते दशहरा से लेकर दिवाली के बीच गोरखपुर शहर में जगह-जगह छापा की कार्रवाई हुई तो खोआ मंडी में पनीर की कमी होने लगी। इसका फायदा उठाते हुए खालिद ने खोआ मंडी में माल भेजना शुरू कर दिया। जल्द ही उसने किराए पर पिकअप तय किया और फिर संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, देवरिया आदि जिलों के प्रमुख बाजारों में माल भेजना शुरू कर दिया। जैसे-जैसे खपत बढ़ी तो धर्मशाला बाजार के एक व्यापारी से मिल्क पाउडर मंगाना शुरू कर दिया। दिसंबर आते-आते हर दिन यहां करीब चार लाख का मिल्क पाउडर खपने लगा।
पाउडर और केमिकल से बनाते थे दूध
इस अवैध फैक्टरी में दूध की जगह सस्ती कंपनी के मिल्क पाउडर का इस्तेमाल होता था। इस पाउडर के घोल में फेबरिक व्हाइटनर, गुलाब जल, इलेक्ट्रोप्लेटिंग पाउडर, सैकरीन आदि मिलाया जाता था। इस तरह तैयार कृत्रिम दूध से फिर पनीर बनता था। शाम होते ही ये लोग दूध व पनीर बनाने का काम शुरू करते थे। सुबह कारखाना बंद हो जाता था।
धंधेबाजी बंद कराने आगे आए थे ग्रामीण
खाद्य सुरक्षा विभाग की अंतरजनपदीय टीम बीते दो मई को इस फैक्टरी पर छापा मारकर पनीर व अन्य सामान नष्ट कराकर जा चुकी थी। इसके बाद भी यहां धंधा उसी तरह से चल रहा था। इसके बाद 20 मई को जब टीम दोबारा यहां छापा मारने पहुंची तो गांव के लोग भी पहुंच गए। ग्रामीणों ने स्वयं आगे बढ़कर टंकियों में भरे मिलावटी दूध को करना शुरू किया। कई केमिकल व उपकरण पकड़कर एक कमरे में एकत्रित किए गए। इसके बाद खाद्य सुरक्षा विभाग के मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी हितेंद्र मोहन तिवारी व खाद्य सुरक्षा अधिकारी शैलेंद्र श्रीवास्तव, अंकुर, नगेंद्र, आभा, संतोष, उमाशंकर, विनय, प्रतिभा, आशुतोष, श्रीनिवास, विजयनंद, स्वामीनाथ, कमलनारायण, नरेंद्र आदि ने उन सामानों का सैंपल लिया था।
वर्जनअंतरजनपदीय टीम की कार्रवाई के बाद भी धंधा चलने की सूचना मिलने पर टीम वहां गई थी। मौके पर ढाई क्विंटल पनीर व 800 लीटर दूध नष्ट कराने के साथ ही सैंपल जांच के लिए भेजा गया था। छानबीन में पता लगा कि कई जिलों तक यहां तैयार मिलावटी पनीर भेजा जा रहा था, जो लोगों की सेहत से सीधे-सीधे खिलवाड़ था। यहां हरियाणा के मेवात से कारीगर बुलाए गए थे। इसीलिए इस बार केस दर्ज कराया गया। अब यहां मिल्क पाउडर की सप्लाई करने वाले व तैयार माल खपाने वालों की भी जांच होगी।
-डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा