दिसंबर में एम्स ने बदल दी एजेंसी, छात्र बीमार हुए तब खुला मामला
तीन महीने पहले भी खराब खाने पर हुआ था हंगामा
पुरानी फर्म भी बिना लाइसेंस के ही हो रही थी संचालित
गोरखपुर। एम्स में दिसंबर में जिस फर्म को हॉस्टल के मेस संचालन का टेंडर मिला है, उसके पास भी स्थानीय खाद्य सुरक्षा विभाग का लाइसेंस नहीं है। इससे पहले सितंबर में भी जो फर्म मेस संचालित कर रही थी, उसके पास भी लाइसेंस नहीं था। खाद्य सुरक्षा विभाग अब एम्स प्रशासन को इस बात के लिए पत्र भेजेगा कि एजेंसी तय करते वक्त खाद्य सुरक्षा विभाग को इसकी जानकारी दी जाए।
एम्स में मेडिकल कॉलेज, अस्पताल और सभागार में संचालित डायनिंग हॉल का किचन सभागार के पास है। इसका संचालन एक फर्म करती है। दूसरी फर्म को हॉस्टल के मेस का टेंडर मिला है। तीसरी फर्म शापिंग कॉम्प्लेक्स और चौथी रैन बसेरा में संचालित मेस संभालती है। बीते दिसंबर में हॉस्टल में संचालित मेस का टेंडर गुजरात की फर्म श्री देवी कैटरर्स को दिया गया था। इसी मेस में बना खाकर छात्र-छात्राओं की तबीयत बिगड़ी है। इस मेस में हर दिन करीब 800 छात्र-छात्राओं का भोजन बनता है।
चर्चा है कि छात्र-छात्राओं के एक समूह ने नॉनवेज खाया था। इसे खाने वाले ही बीमार भी हुए थे। क्योंकि मेस में बना अन्य खाना खाकर दूसरे छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य पर प्रभाव नहीं पड़ा है। बृहस्पतिवार को पहुंची खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम को फ्रिज में चिकन मिला है। खाद्य सुरक्षा टीम ने मेस संचालन करने वाली फर्म से लाइसेंस मांगा तो वे कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। कहा जा रहा है कि इस फर्म ने अभी तक लाइसेंस के लिए स्थानीय स्तर पर आवेदन भी नहीं किया है। जबकि, इतना बड़ा मेस संचालित करने से पहले लाइसेंस अनिवार्य होता है। बीते साल सितंबर में भी मेस के खाने को लेकर छात्रों ने आपत्ति की थी, जिसके बाद तत्कालीन कार्यकारी निदेशक डॉ. जीके पाल ने जांच कराई तो कई कमियां मिली थीं। पुरानी फर्म को बदलकर जिस नई फर्म को काम दिया गया, उसने भी पिछली गलतियों से कोई सबक नहीं लिया।
बार-बार इस तरह के मामले आने के बाद अब खाद्य सुरक्षा विभाग ने यह तय किया है कि एम्स प्रशासन को इस बात के लिए पत्र लिखा जाएगा कि मेस से संबंधित एजेंसी चयन करते समय कमेटी में खाद्य सुरक्षा विभाग के भी प्रतिनिधि को रखा जाए।
एम्स के डिप्टी डायरेक्टर प्रशासन अरुण कुमार सिंह ने बताया कि जिस फर्म को हॉस्टल के मेस के संचालन का टेंडर मिला है, उनके पास नेशनल लेवल का लाइसेंस है, लेकिन स्थानीय स्तर पर लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं किया है। यह फर्म संचालक की गलती है। पिछली बार फर्म ने आवेदन किया था, लेकिन उसे लाइसेंस नहीं मिला था। इस प्रकरण की जांच चल रही है। अगर एजेंसी दोषी होगी तो उस पर अनुबंध की शर्तों के आधार पर कार्रवाई होगी।
खुली थी नालियां, सफाई का नहीं रखा ख्याल
हॉस्टल के जिस मेस में छात्र-छात्राओं के लिए भोजन बनता है, वहां सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता है। वहां की नालियां खुली हैं और किचन उसके स्टोर में भी सफाई की हालत खराब है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में यह बात सामने आने के बाद अब जिम्मेदारों को नोटिस भेजने की तैयारी चल रही है। उधर, एम्स प्रशासन ने भी इसे गंभीरता से लेते हुए एजेंसी को सफाई का विशेष ख्याल रखने का निर्देश दिया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी हितेंद्र मोहन त्रिपाठी ने बताया कि मामले से एम्स प्रशासन को भी अवगत कराया गया है।
एम्स प्रशासन भी कराएगा जांच : कार्यकारी निदेशक
फूड प्वाॅइजनिंग से छात्र-छात्राओं के बीमार होने के प्रकरण की जांच के लिए एम्स प्रशासन ने भी दो सदस्यीय कमेटी बनाई है। इसमें डीन एकेडमिक डॉ. महिमा मित्तल और डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. शिखा सेठ की अगुवाई में जांच टीम गठित कर दी गई है। टीम ने जांच शुरू भी कर दी है। यह टीम शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट देगी। इसके अलावा खाद्य पदार्थों के सैंपल की जांच के लिए माइक्रोबॉयालॉजी लैब में भी सैंपल भेजा जा रहा है, जिससे खाने की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों का सही आकलन किया जा सके। मेस के पास नाली खुली होने व सफाई व्यवस्था ठीक नहीं होने की जानकारी मिली है। इसे भी जांच रिपोर्ट में शामिल कराया जाएगा, जिससे कि इसे ठीक कराया जा सके।
डॉ. अजय कुमार सिंह, कार्यकारी निदेशक एम्स
वर्जन
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने हॉस्टल के मेस और खाने की जांच की। यहां से पांच सैंपल लिए गए हैं। किचन में बासी चिकन मिला है। इसके अलावा दही के पैकेट पर एक्सपायरी डेट भी नहीं लिखी थी। फर्म का स्थानीय स्तर पर लाइसेंस भी नहीं है। हम एम्स प्रशासन को पत्र लिखकर इस बात का सुझाव देंगे कि किचन में अनिवार्य रूप से कैमरा लगवाएं, जिससे कि ऐसे प्रकरण में मिलावट की जांच हो सके। इसके अलावा एजेंसी चयनित करते वक्त खाद्य सुरक्षा विभाग के एक प्रतिनिधि को भी कमेटी में रखा जाए, जिससे कि लाइसेंस नहीं होने की समस्या न आए।
डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य