गोरखपुर नगर निगम के टैक्स विभाग में पांच करोड़ रुपये के टैक्स की हेराफेरी की आशंका है। करीब 200 चेक का हिसाब नहीं मिल रहा है। कंप्यूटर विभाग में तो चेक के आंकड़े दर्ज हैं, लेकिन लेखा विभाग में इनका अता-पता नहीं है। मामले में लापरवाही बरतने पर नगर आयुक्त ने नायर मोहर्रिर को निलंबित कर दिया है। साथ ही केंद्रीय सेवा के दो राजस्व निरीक्षकों को निलंबित करने के लिए शासन से संस्तुति की है। कंप्यूटर विभाग के दो कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, नगर निगम के कर विभाग के कर निरीक्षकों ने गृहकर, जलकर व सीवर कर वसूली से प्राप्त लगभग पांच करोड़ रुपये के चेक आईडी पासवर्ड से कंप्यूटर विभाग में तैनात लिपिकों के साथ मिलकर फीड करा लिया। लेकिन, चेक बैंक से वसूली के लिए लेखा विभाग में जमा नहीं किए गए। इस कारण यह धनराशि नगर निगम कोष में जमा नहीं हुई और निगम को आर्थिक क्षति हुई।
नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने बताया कि नायब मोहर्रिर आलोक कुमार मिश्रा ने 46 चेक के कुल 21,79,847 रुपये आईडी पासवर्ड से फीड कराए। लेकिन, इस चेक को लेखा विभाग में जमा नहीं कराया। आलोक कुमार मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उप नगर आयुक्त को जांच अधिकारी बनाया गया है।
इसी तरह केंद्रीयत सेवा के राजस्व निरीक्षक दुर्गेश प्रताप सिंह ने 47 चेक आईडी पासवर्ड से कुल 7,85,256 रुपये फीड कराए तथा राजस्व निरीक्षक अनुराग शाही ने 86 चेक आईडी पासवर्ड से कुल 23,30,448 रुपये के फीड कराए गए, किंतु चेक को लेखा विभाग में जमा नहीं कराया। केंद्रीयत सेवा के राजस्व निरीक्षक दुर्गेश प्रताप सिंह एवं अनुराग शाही को निलंबित करने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
इस संबंध में कंप्यूटर विभाग में तैनात लिपिक रविकांत सैनी एवं असगर अली को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसी तरह के कई और मामले हैं। सभी को मिलाकर कुल पांच करोड़ रुपये की हेराफेरी की आशंका जताई जा रही है।