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विधायक बोले-हम साढ़े चार लाख जनता के नुमाइंदे हैं, किसी भी हद तक जाएंगे...

Fri, 10 Jan 2020 11:58 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
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नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल। - फोटो : अमर उजाला
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नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा- हम साढ़े चार लाख जनता के नुमाइंदे हैं। राजनीतिक करिअर से अधिक उनकी समस्याओं का निस्तारण प्राथमिकता में है। इसके लिए हम किसी भी हद तक जाएंगे। विधायक मुख्यमंत्री के आंख-नाक होते हैं, ऐसे में सभी योजनाओं की मॉनिटरिंग करेंगे। अगर हम ऐसा नहीं करते हैं तो यह हमारी लापरवाही मानी जाएगी।
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बृहस्पतिवार को नगर विधायक ने दाउदपुर स्थित अपने आवास पर पत्रकार वार्ता में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा सपा सरकार के समय पीलिया के जिम्मेदार नगर आयुक्त, मुख्य अभियंता और नगर स्वास्थ्य अधिकारी को सस्पेंड कराया। भ्रष्टाचार के आरोप में जीडीए के 34 अधिकारियों और अभियंताओं को दंडित कराया। अपनी सरकार में भ्रष्टाचार से समझौता कैसे करने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल निगम के अभियंताओं ने गोरखपुर को अपने लूट का हिस्सा समझ लिया था।

लापरवाही से और भीषण लापरवाही, भ्रष्टाचार और अनुभवहीन कार्यप्रणाली से गोरखपुर के लाखों नागरिकों का जीवन नारकीय बना दिया था। घटिया पानी की पाइपलाइन डाल दी। नंदानगर से लेकर मालवीयनगर में सीवर लाइन डालने के नाम पर सारी सड़कें तोड़ डालीं। लोग दो साल से नरक भोग रहे हैं।
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जल निगम के अध्यक्ष ने भी माना सारी सड़कों का काटना गलत

नगर विधायक ने बताया कि जल निगम के अध्यक्ष जी. पटनायक लखनऊ में वार्ता के दौरान स्वीकार किया कि सारी सड़कें एक साथ काटना गलत था। क्रमवार सीवर लाइन बिछाने और सड़क बनवाने के बाद दूसरी जगह खुदाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा है कि अब पहले सारी सड़कें पहले बनेगी फिर सीवर लाइन डाली जाएगी।

चीफ टेक्निकल एडवाइजर करेंगे जांच फिर करेंगे निर्णय
विधायक ने बताया कि जल निगम के चीफ टेकिभनकल जुबैर अहमद तथा एसएन मणि स्वयं गोरखपुर आकर सीवर लाईन की जांच करेंगे। इसके बाद पहले सड़क बनवाने के लिए तकनीकी आधार पर निर्णय लिया जाएगा। साथ ही घटिया पाईप डालने वाले तथा उन्हें बचाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और खराब पाइप बदलने का भी आश्वासन मिला है।

सरकार की छवि न बिगड़े इस लिए काम पर लौटे
सदर विधायक के दुर्व्यवहार से व्यथित होने के बावजूद उच्चाधिकारी से हुई वार्ता में जनहित एवं सरकार की छवि को ध्यान में रखते हुए परियोजना के सभी इंजीनियर काम पर वापस लौट आए हैं। इस फैसले से जल निगम के महाप्रबंधक को भी अवगत करा दिया गया है।
- रतनसेन सिंह, परियोजना प्रबंधक रामगढ़ ताल
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