घूस न देने पर 144 दरोगाओं को गोरखपुर में जूनियर किए जाने के आरोपों के बीच मामले में नया मोड़ आ गया है। एसएसपी की ओर से कराई गई जांच में पता चला है कि यह गड़बड़ी गोरखपुर से हुई ही नहीं है। यह पूरा मामला सूचना तकनीकी सेवा विभाग लखनऊ संभालता है।
एसएसपी के मुताबिक, पीएनओ वहीं से जारी हुआ था। उन्होंने बताया कि सब इंस्पेक्टरों की भर्ती का रिकॉर्ड मंगाने के बाद उसे ठीक करने के लिए तकनीकी सेवा विभाग, लखनऊ को भेजा जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, 2015 और 2017 बैच में गोरखपुर से नौकरी की शुरुआत करने वाले 144 सब इंस्पेक्टरों को एक से दो साल जूनियर कर दिया गया है। गोरखपुर में ज्वानिंग करते ही वे अपने साथियों से एक से दो साल पीछे हो गए।
सभी का आरोप है कि पुलिस कार्यालय में तैनात रहे बर्खास्त बाबू ज्ञानेंद्र सिंह की गलती से ऐसा हुआ था। मामला सामने आने के बाद एसएसपी ने जांच कराई तो यहां से कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। एसएसपी की ओर से बताया गया कि वर्ष 2015, 2016, 2017, 2018 के भर्ती उपनिरीक्षकों का ट्रेनिंग के बाद जनपद में आगमन की तिथि से नियमित वेतन निर्धारित किया गया है।
दरोगाओं की जनपद आगमन की तिथि के आधार पर बायोडाटा संबंधित कर्मी से भरवाकर निर्धारित प्रारूप में सूचना तकनीकी सेवा विभाग लखनऊ को प्रेषित किया गया था, जिसके आधार पर पीएनओ नंबर आवंटित किया गया है। पीएनओ आवंटन की प्रक्रिया तकनीकी सेवा उत्तर प्रदेश लखनऊ द्वारा ही संपादित की जाती है, जनपद स्तर पर उपनिरीक्षक का पीएनओ आवंटित नहीं किया जाता है।
गोरखपुर में तैनात उपनिरीक्षक के सेवाभिलेख से स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि उन्होंने प्रशिक्षण केंद्र में कब प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इसके लिए संबंधित प्रशिक्षण केंद्र पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय सीतापुर, मुरादाबाद और उन्नाव से पत्राचार किया गया है। प्रशिक्षण केंद्र से आख्या प्राप्त होने पर उसके अनुसार पीएनओ के संबंध में निर्धारित प्रारूप में बायोडाटा तैयार कर आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक तकनीकी सेवा उत्तर प्रदेश लखनऊ को भेजा जाएगा।