गोरखपुर को मेट्रोपोलिटन सिटी बनाने का रास्ता साफ
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गोरखपुर को मेट्रोपोलिटन सिटी बनाने और लाइट मेट्रो चलाने में कम आबादी की बाधा सरकार ने शुक्रवार को दूर कर दी। इसके लिए पिपराइच नगरपालिका और गोरखपुर से सटे चार विकास खंडों को गोरखपुर नगर निगम में शामिल करने के प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के माध्यम से मंजूरी दे दी गई है। इससे शहर में 4589 करोड़ रुपये की लागत से मेट्रो चलाने का रास्ता साफ हो गया है। राइट्स एवं लखनऊ रेल मेट्रो कॉरपोरेशन ने इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट का अनुमोदन कर पहले ही शासन को भेज दिया है।
दरअसल राज्य सरकार गोरखपुर में लाइट मेट्रो चलाना चाहती है, लेकिन इसके लिए शहर को मेट्रोपोलिटन घोषित करना जरूरी होता है। अभी तक आबादी कम होने के कारण यह शहर उस दायरे में नहीं आ पा रहा था। देश के भीतर लाइट और नियो मेट्रो को दौड़ाने पर केंद्रीय बजट के बाद अब यूपी सरकार के बजट में भी फंड आवंटित होने से गोरखपुर में मेट्रो दौड़ाने के काम में तेजी आने की उम्मीद जगी थी।
गोरखपुर में तीन बोगियों वाली लाइट मेट्रो को दौड़ाने की तैयारी है। राइट्स व लखनऊ रेल मेट्रो कॉरपोरेशन ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) का अनुमोदन कर शासन को भेज दिया है। राज्य सरकार के बजट में भी गोरखपुर और वाराणसी में मेट्रो के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि जल्द ही गोरखपुर मेट्रो के प्रस्ताव को केंद्र से भी हरी झंडी मिल जाएगी।
मेट्रो रूट पर होंगे कुल 14 स्टेशन
डीपीआर के मुताबिक, शहर में 4589 करोड़ रुपये की लागत से तीन बोगियों (कार) वाली मेट्रो दौड़ेगी। इसके लिए दो रूट तय किए गए हैं। पहला रूट 15.14 किमी लंबा होगा, जो श्यामनगर (बरगदवां के पास) से मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय तक का होगा। इस पर कुल 14 स्टेशन होंगे। दूसरा रूट गुलरिहा से शुरू होकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज, असुरन चौक, धर्मशाला, गोलघर, कचहरी चौराहा होते हुए नौसड़ तक जाएगा। यह 12.70 किमी लंबा रूट है, जिसपर 12 स्टेशन होंगे।